अलवर/झाड़ोल। प्रतिभा और जुनून किसी उम्र के मोहताज नहीं होते, इस कहावत को झाड़ोल तहसील के छातरड़ी गाँव के निवासी मोहन सिंह चौहान ने सच कर दिखाया है। मास्टर एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वाधान में राजस्थान स्टेट मास्टर एथलेटिक एसोसिएशन द्वारा अलवर के राजर्षि कॉलेज में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में मोहन सिंह ने अपनी खेल कुशलता का लोहा मनवाते हुए एक नहीं, बल्कि तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। उनकी इस स्वर्णिम सफलता ने न केवल उदयपुर जिले का मान बढ़ाया है, बल्कि खेल प्रेमियों के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय भी लिख दिया है।

4 जनवरी को संपन्न हुई इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप में मोहन सिंह चौहान ने अपनी शक्ति और तकनीक का अद्भुत तालमेल प्रदर्शित किया। उन्होंने डिस्कस थ्रो में 31.70 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर पहला स्थान प्राप्त किया। इसके उपरांत शॉटपुट (गोला फेंक) स्पर्धा में 11.10 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर दूसरा स्वर्ण पदक जीता। मोहन सिंह का विजय रथ यहीं नहीं रुका; उन्होंने हैमर थ्रो में 28.15 मीटर का शानदार थ्रो कर अपनी तीसरी स्वर्णिम जीत दर्ज की। 70 वर्ष की आयु में उनकी इस शारीरिक सक्षमता और खेल के प्रति समर्पण को देख आयोजन स्थल पर मौजूद हर कोई दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गया।

राज्य स्तर पर मिली इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद अब मोहन सिंह चौहान के कंधों पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने की बड़ी जिम्मेदारी है। आगामी 28 जनवरी से 1 फरवरी तक केरल के तिरुवनंतपुरम में आयोजित होने वाली '46वीं नेशनल मास्टर एथलेटिक चैंपियनशिप' में वह भाग लेंगे। इस राष्ट्रीय मंच पर चौहान 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के समूह में राजस्थान की ओर से अपनी चुनौती पेश करेंगे। उनकी इस उपलब्धि से छातरड़ी गाँव सहित पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। यह जीत न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह संदेश देती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर सफलता के शिखर को छुआ जा सकता है।

Pratahkal Bureau

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