जीवन का अंतिम सत्य क्या है, हम इस दुनिया में क्यों आए हैं और अंत में हमें कहां जाना है? ये ऐसे सवाल हैं, जिन पर विचार करना हर इंसान के लिए जरूरी है। राष्ट्र गौरव पारस जैन ‘पार्श्वमणि’, पत्रकार, कोटा (राज.), ने अपने विचारों के माध्यम से जीवन के उद्देश्य, अच्छे कर्मों, विनम्रता, समर्पण और मानव जीवन की नश्वरता को समझाने का प्रयास किया है। उनके अनुसार, मानव जीवन केवल सांसारिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि आत्मा से परमात्मा तक की यात्रा पूरी करने का अवसर है।

मनुष्य को यह दुर्लभ और चिंतामणि रत्न के समान मानव पर्याय क्यों मिला है, हम कहां से आए हैं, क्यों आए हैं और हमें कहां जाना है, इन प्रश्नों पर विचार करना आवश्यक है। जीवन का उद्देश्य मानव से महामानव, कंकड़ से शंकर, तितर से तीर्थंकर, पाषाण से परमात्मा और फर्श से अर्श तक की यात्रा करना है। यह आत्मा से परमात्मा बनने की आध्यात्मिक यात्रा भी है।

जीवन हाथ में ली हुई रेत की तरह धीरे-धीरे निकल जाता है और इंसान को इसका अहसास तक नहीं होता। ऐसे में जरूरी है कि व्यक्ति अच्छा आचरण करे, अच्छे शब्द बोले, अच्छे कर्म करे और किसी का बुरा न करे। सद्कर्मों के अतिरिक्त कुछ भी मनुष्य के साथ नहीं जाता। प्रकृति, नियति और सृष्टि अपने नियम नहीं बदलतीं। जीवन का सिद्धांत है कि जैसा करोगे, वैसा ही फल मिलेगा। जो बोएगा, वही पाएगा और अपने किए का परिणाम एक दिन सामने आएगा। ‘जैसी करनी, वैसी भरनी’ का सिद्धांत इसी अटल सत्य को दर्शाता है।

जीवन को बेहतर बनाने के लिए अहंकार छोड़कर विनम्रता अपनाने का संदेश भी दिया गया है। इसके लिए बांस और घास का उदाहरण दिया गया है। बांस अकड़कर और तनकर खड़ा रहता है, लेकिन थोड़ी-सी आंधी आने पर टूटकर बिखर सकता है। इसके विपरीत, घास हवा के साथ झुक जाती है और लचक जाती है, लेकिन टूटती नहीं। आंधी गुजरने के बाद वह फिर खड़ी हो जाती है।

इसी तरह जीवन में अहंकार के साथ अकड़कर चलने वाला व्यक्ति संकट आने पर बिखर सकता है, जबकि विनम्रता से परिस्थितियों का सामना करने वाला व्यक्ति कठिनाइयों से उबरने का रास्ता खोज सकता है। इसलिए जीवन में बांस की तरह कठोर और अहंकारी बनने के बजाय घास की तरह लचीला और विनम्र बनने की सीख दी गई है।

जीवन में तर्क के बजाय समर्पण को महत्व देने की बात भी कही गई है। विचार के अनुसार, तर्क में नर्क है और समर्पण में स्वर्ग। तर्क व्यक्ति को उलझा सकता है, बहस में डाल सकता है और रिश्तों में दूरी पैदा कर सकता है। जहां हर बात पर विवाद और बहस होती है, वहां अशांति बढ़ती है। इसके विपरीत, विश्वास, प्रेम और समर्पण से जीवन में शांति और सद्भाव कायम हो सकता है। परिवार हो या समाज, देश हो या राष्ट्र, समर्पण को जीवन को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।

जीवन का अंतिम सत्य शरीर की नश्वरता से जुड़ा है। पंचतत्त्वों से बना यह शरीर अंत में उन्हीं पंचतत्त्वों में विलीन हो जाता है। इसी सत्य को मिट्टी से जुड़ी इन पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त किया गया है:

“मिट्टी की धरती सारी, मिट्टी के देव पुजारी।

मिट्टी के ऊपर रहते, मिट्टी के जीव धारी।

मिट्टी के नर और नारी, मिट्टी की दुनिया सारी।

मिट्टी में मिल जाएगी, मिट्टी हमारी।”

इन पंक्तियों का भाव यही है कि जिस धरती पर मनुष्य रहता है, वह मिट्टी है। जिन देवताओं की पूजा की जाती है, वे भी मिट्टी से बने हैं। इस धरती पर रहने वाले सभी नर-नारी और जीव-जंतु प्रकृति का हिस्सा हैं और अंततः शरीर को मिट्टी में ही मिल जाना है।

जब जीवन का अंतिम पड़ाव मिट्टी में मिलना है, तो फिर अहंकार और घमंड का क्या अर्थ रह जाता है? जब शरीर नश्वर है, तो तर्क के नाम पर अहंकार पालने और रिश्तों में कटुता बढ़ाने का औचित्य भी विचारणीय है। जीवन की इस सच्चाई को समझते हुए व्यक्ति को सहनशीलता, विनम्रता, अच्छे कर्मों और समर्पण को अपने आचरण का हिस्सा बनाना चाहिए।

जीवन के इसी संदेश का निष्कर्ष है कि मनुष्य मिट्टी की तरह सहनशील बने, घास की तरह विनम्र रहे और समर्पण के साथ जीवन जिए। राष्ट्र गौरव पारस जैन ‘पार्श्वमणि’, पत्रकार, कोटा (राज.), की इस प्रस्तुति में जीवन के उद्देश्य से लेकर शरीर की नश्वरता तक के विचारों के माध्यम से अच्छे कर्मों, मानवीय व्यवहार और अहंकार त्यागने के महत्व को रेखांकित किया गया है।

Dharnendra Jain( Kherwara)

Dharnendra Jain( Kherwara)

नाम: धरणेन्द्र जैन

वर्तमान पद: सीनियर रिपोर्टर (प्रातः काल दैनिक, खेरवाड़ा विधानसभा)

कार्यक्षेत्र: खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (खेरवाड़ा, ऋषभदेव, और नयागांव उपखंड क्षेत्र, जिला उदयपुर, राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों की खबरें

अनुभव: 30 वर्ष से अधिक

परिचय 

धरणेन्द्र जैन उदयपुर जिले के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल दैनिक' में सीनियर रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मुख्य रूप से खेरवाड़ा, ऋषभदेव और नयागांव उपखंड क्षेत्र को कवर करते हैं। धरणेन्द्र जैन राजनीति, क्राइम, स्थानीय प्रशासन सहित क्षेत्र के सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

धरणेन्द्र जैन को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों (30 वर्ष) से अधिक का व्यापक और लंबा अनुभव है:

  • वह साल 1995 से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं।
  • उन्होंने वर्ष 1998 से 2018 तक लगातार 20 वर्षों तक 'दैनिक भास्कर' में खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए सीनियर रिपोर्टिंग की है।
  • वर्ष 2018 से वह लगातार 'प्रातः काल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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