मन को वश में करने का महत्व: जानिए गीता और महावीर स्वामी के विचार
मन की चंचलता और मोह-माया से मुक्ति पाने के लिए आत्मचिंतन और संयम को बताया गया है सबसे कारगर उपाय।

तस्वीर में दिख रहे एक व्यक्ति नेहरू जैकेट पहने सामने की ओर देख रहे हैं।
संसार में मन से बड़ा बहुरूपी कोई नहीं है। वह पल-पल अपना रूप बदलता है, कभी खुशी के सपने दिखाता है तो कभी दुख के सागर में डुबो देता है। मन की यही चंचलता मनुष्य को जीवनभर भटकाती रहती है। इसलिए जीवन की सबसे बड़ी चुनौती संसार को जीतना नहीं, बल्कि अपने मन को जीतना है।
कहा गया है, "माया ममता में उलझा रहे वो, पड़ जाए जो मन के पाले।" जब मनुष्य मन के अधीन हो जाता है, तो वह मोह, माया, लोभ और ममता के जाल में उलझ जाता है। ऐसी स्थिति में उसे सही-गलत का भेद समझ नहीं आता। मन उसे तरह-तरह के प्रलोभन दिखाता है और व्यक्ति अपने लक्ष्य से भटक जाता है।
"मन के बहकावे में ना आ, मन राह भुलाए भ्रम में डाले।" यह पंक्ति आज के समय में और भी प्रासंगिक है। सोशल मीडिया और भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में मनुष्य लगातार भ्रमित हो रहा है। वह शांति बाहर खोजता है, जबकि शांति उसके भीतर है।
गीता में भी भगवान कृष्ण ने कहा है कि मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है। इसलिए संत कहते हैं, "तू इस मन का दास ना बन, इस मन को अपना दास बना ले।" मन को दास बनाना अर्थात मन पर नियंत्रण करना है। यह संयम, तप, त्याग और साधना तथा आत्मचिंतन से ही संभव है।
जब मनुष्य मन को साक्षी भाव से देखना सीख जाता है और उसके हर विचार पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं देता, तभी वह मन का स्वामी बनता है। जिसने मन को जीत लिया, उसने संसार को जीत लिया। भगवान महावीर स्वामी ने भी यही कहा, "संसार को जानने की जरूरत नहीं है स्वयं को जान लीजिये। संसार को नहीं जितना है स्वयं को जीत लीजिएगा।"

Dharnendra Jain( Kherwara)
नाम: धरणेन्द्र जैन
वर्तमान पद: सीनियर रिपोर्टर (प्रातः काल दैनिक, खेरवाड़ा विधानसभा)
कार्यक्षेत्र: खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (खेरवाड़ा, ऋषभदेव, और नयागांव उपखंड क्षेत्र, जिला उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों की खबरें
अनुभव: 30 वर्ष से अधिक
परिचय
धरणेन्द्र जैन उदयपुर जिले के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल दैनिक' में सीनियर रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मुख्य रूप से खेरवाड़ा, ऋषभदेव और नयागांव उपखंड क्षेत्र को कवर करते हैं। धरणेन्द्र जैन राजनीति, क्राइम, स्थानीय प्रशासन सहित क्षेत्र के सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
धरणेन्द्र जैन को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों (30 वर्ष) से अधिक का व्यापक और लंबा अनुभव है:
- वह साल 1995 से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं।
- उन्होंने वर्ष 1998 से 2018 तक लगातार 20 वर्षों तक 'दैनिक भास्कर' में खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए सीनियर रिपोर्टिंग की है।
- वर्ष 2018 से वह लगातार 'प्रातः काल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
