हिन्दुस्तान जिंक ने शुरू किया 'जंग के खिलाफ जिंक' अभियान 2026
अभियान का लक्ष्य गैल्वेनाइजेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाकर जंग से देश की जीडीपी को होने वाले 5 प्रतिशत के नुकसान को कम करना और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना है।

उदयपुर। भारत के एकमात्र और विश्व के सबसे बड़े एकीकृत जिंक उत्पादक, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने अपने वर्ष 2025 के सफल जागरूकता अभियान की निरंतरता में वर्ष 2026 के लिए अपने प्रमुख राष्ट्रव्यापी अभियान 'जंग के खिलाफ जिंक' के विस्तार की आधिकारिक घोषणा की है। इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को न केवल जंग के दुष्परिणामों के प्रति सचेत करना है, बल्कि उन्हें इससे बचाव के प्रभावी उपाय अपनाने हेतु प्रेरित करना भी है। 'वर्ल्ड क्ररोशन अवेयरनेस डे' (विश्व संक्षारण जागरूकता दिवस) के अवसर पर केंद्रित यह पहल जंग को महज एक औद्योगिक समस्या के बजाय एक गंभीर घरेलू मुद्दे के रूप में रेखांकित करती है। उल्लेखनीय है कि भारत की विशिष्ट जलवायु परिस्थितियों, जैसे अत्यधिक गर्मी, उमस और बढ़ते प्रदूषण के कारण यहाँ जंग लगने की प्रक्रिया अत्यंत तीव्र हो जाती है, जिससे देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को प्रतिवर्ष लगभग 5 प्रतिशत तक की भारी क्षति होने का अनुमान है।
अपने पिछले संस्करण की अपार सफलता से उत्साहित होकर हिन्दुस्तान जिंक इस वर्ष कई विविध माध्यमों और अखिल भारतीय स्तर पर प्रचार-प्रसार के जरिए इस अभियान को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। इस अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कंपनी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट एचजेडएलइण्डिया डॉट कॉम पर एक विशिष्ट 'जिंक गैल्वेनाइजेशन इंफॉरमेशन' हब का शुभारंभ किया है। इस डिजिटल हब को ग्राहकों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं के लिए एक केंद्रीय संसाधन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ उपभोक्ता जिंक गैल्वेनाइजेशन के बहुआयामी फायदों और जंग से सुरक्षा के सरल तकनीकी तरीकों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
अभियान के अंतर्गत मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में रेडियो के माध्यम से विशेष जिंगल्स का प्रसारण किया जा रहा है, जो मुख्य रूप से कार मालिकों को जंग से होने वाली वित्तीय और संरचनात्मक हानि के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इसके समानांतर, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक सशक्त मीडिया अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसमें ऑटोमोबाइल, घरेलू फिटिंग, रेलवे, ट्रांसमिशन पोल और बड़े पैमाने के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में जस्ता (जिंक) की अपरिहार्य भूमिका को प्रदर्शित किया गया है। जमीनी हकीकत का आकलन करने हेतु मुंबई में आम जनता के बीच किए गए सर्वे से यह तथ्य उभरकर सामने आया कि यद्यपि लोग जंग को एक बड़ी समस्या मानते हैं, किंतु वे इसके वैज्ञानिक बचाव के तरीकों से पूर्णतः अनभिज्ञ हैं।
इस महत्वपूर्ण पहल पर अपने विचार साझा करते हुए हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अरुण मिश्रा ने कहा कि जंग को अक्सर केवल एक औद्योगिक समस्या मान लिया जाता है, परंतु वास्तविकता में यह हर व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती है, चाहे वह हमारे वाहन हों, हमारे घर हों या वह बुनियादी ढांचा जिस पर हम प्रतिदिन निर्भर रहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'जंग के खिलाफ जिंक' अभियान के माध्यम से कंपनी का प्रयास जागरूकता से आगे बढ़कर लोगों को इसके दीर्घकालिक प्रभावों के प्रति शिक्षित करना और उन्हें कार्रवाई के लिए प्रेरित करना है। श्री मिश्रा के अनुसार, जिंक गैल्वेनाइजेशन एक सस्टेनेबल और अत्यंत प्रभावी समाधान है, जिसे हर नागरिक तक पहुँचाना इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य है।
तकनीकी रूप से जिंक गैल्वेनाइजेशन जंग से निपटने हेतु वैश्विक स्तर पर सबसे विश्वसनीय पद्धतियों में से एक है, जो स्टील के जीवनकाल को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है और दीर्घकालिक रखरखाव लागत में भारी कटौती करता है। 'जंग के खिलाफ जिंक' अभियान 2026 के माध्यम से हिन्दुस्तान जिंक व्यापक स्तर पर जागरूकता-आधारित सक्रियता को बढ़ावा देने, राष्ट्र के बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करने और अधिक सस्टेनेबल भविष्य के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करता है।

