हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की विजय को लेकर वर्षों से चले आ रहे ऐतिहासिक विवाद और तथ्यों को लेकर नई चर्चा के बीच वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति ने इसे सत्य इतिहास को समाज के सामने स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया है। आगामी 17 जून को गांधी ग्राउंड में आयोजित होने वाली विशाल राष्ट्र चेतना संकल्प सभा की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं।

प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के पद्मिनी सभागार में आयोजित तैयारी बैठक को संबोधित करते हुए समिति के सम्पर्क अधिकारी एवं इतिहासविद् हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि वर्ष 1947 में देश को केवल स्वराज मिला, लेकिन स्वत्व जागरण नहीं हो सका। इसी कारण कम्युनिस्ट मानसिकता ने पाठ्यपुस्तकों में भारतवर्ष के सत्य इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया, जिसे आज की पीढ़ियां पढ़ती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी सार्द्ध चतुःशती उत्सव उस मिथक को तोड़ने का प्रयास है कि हल्दीघाटी युद्ध में अंततः किसकी विजय हुई थी।

राठौड़ ने कहा कि तथ्यों के आधार पर प्रमाणित वह सत्य, जिसे अब तक छिपाया गया, यह दर्शाता है कि महाराणा प्रताप विजयी हुए थे। उन्होंने कहा कि इस विजय के सूत्रों को समाजव्यापी स्थापित करने तथा कुटिल कम्युनिस्टों के षड़यंत्र को उजागर करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।

बैठक में व्यवस्था पक्ष के प्रबंधन पर मार्गदर्शन देते हुए राठौड़ ने कहा कि किसी भी आयोजन की सफलता की नींव व्यवस्थाओं के सूक्ष्मतम विचार में निहित होती है। उन्होंने कहा कि आयोजनों के प्रबंधन में निरंतर जुड़ने वाले कार्यकर्ताओं में व्यवस्था संचालन का कौशल स्वतः विकसित हो जाता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों का एकाग्रता के साथ निर्वहन करते हुए संबंधित व्यवस्थाओं के बीच बेहतर सामंजस्य भी बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं में लगे कई कार्यकर्ताओं को मूल कार्यक्रम से वंचित रहना पड़ता है, लेकिन उनका यही योगदान आयोजन को उच्च स्तर तक पहुंचाता है।

प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि बैठक में समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा तथा महामंत्री दीपक कुमार शुक्ल ने भी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया।

उल्लेखनीय है कि प्रताप गौरव केन्द्र के तत्वावधान में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती एवं हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुःशती उत्सव के तहत 17 जून को महाराणा भूपाल स्टेडियम स्थित गांधी ग्राउंड में प्रातः 9:30 बजे विशाल राष्ट्र चेतना संकल्प सभा आयोजित होगी। सभा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत संबोधित करेंगे।

इस वर्ष एक विशेष संयोग भी बन रहा है। 18 जून को मनाए जाने वाले हल्दीघाटी विजय दिवस से ठीक एक दिन पूर्व, 17 जून को ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया तिथि है, जिस दिन महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। पूरे देश में इसी दिन महाराणा प्रताप जयंती मनाई जाएगी। साथ ही हल्दीघाटी विजय के 450वें वर्ष के उपलक्ष्य में प्रताप गौरव केन्द्र के तत्वावधान में संचालित आयोजनों का समापन भी इसी दिन होगा।

कार्यक्रम संयोजक सीए महावीर चपलोत ने बताया कि आयोजन को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त रखने का प्रयास किया जाएगा। अतिथियों के लिए पानी की बोतलों के स्थान पर मिट्टी के पात्रों का उपयोग किया जाएगा तथा कूड़ेदान भी मिट्टी से निर्मित होंगे। गांधी ग्राउंड में 15 जून से तीन दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के शौर्य और पराक्रम को दर्शाने वाले चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। शहर के प्रमुख चौराहों को भगवा पताकाओं से सजाया जाएगा तथा देशभक्ति गीतों की गूंज से वातावरण राष्ट्रभावना से ओतप्रोत रहेगा।

महाराणा प्रताप जयंती, हल्दीघाटी विजय के 450वें वर्ष और राष्ट्र चेतना संकल्प सभा का यह आयोजन इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के व्यापक प्रसार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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