गुलाब सिंह शक्तावत की जयंती पर खेरोदा में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री स्वर्गीय गुलाब सिंह शक्तावत की जयंती पर कांग्रेस नेताओं और स्थानीय लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर जनसेवा का संकल्प लिया।

उदयपुर के खेरोदा कस्बे के गुलाब नगर में पूर्व गृहमंत्री स्वर्गीय गुलाब सिंह शक्तावत की जयंती पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक।
खेरोदा, 30 मई (2026): राजस्थान के राजनीतिक क्षितिज पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले पूर्व गृहमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्वर्गीय गुलाब सिंह शक्तावत की जन्म जयंती के पावन अवसर पर आज खेरोदा कस्बे के गुलाब नगर में एक भव्य एवं गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और समर्पित कांग्रेस जनों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा, जिन्होंने शक्तावत जी की प्रतिमा स्थल पर एकत्रित होकर उनकी आदमकद प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक माल्यार्पण किया और अपनी भावभीनी अंजलि अर्पित की। संपूर्ण वातावरण देशभक्ति और शक्तावत जी के अमर आदर्शों के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
इस संवेदनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित समस्त जनसमुदाय ने स्वर्गीय शक्तावत के उच्च सिद्धांतों, त्याग और जन-कल्याणकारी आदर्शों पर अडिग रहने का संकल्प लेते हुए एक सामूहिक शपथ ग्रहण की। इस गौरवमयी स्मृति सभा में क्षेत्र के कई वरिष्ठ और प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष सुनील कुकड़ा, पूर्व ब्लॉक उपाध्यक्ष कल्याण सिंह राणावत, खेरोदा नगर अध्यक्ष भेरूलाल पाराशर, पूर्व अध्यक्ष गणेश गिरी, यूथ देहात उपाध्यक्ष अकबर खान तथा उप सरपंच लक्ष्मीलाल जणवा विशेष रूप से सम्मिलित रहे।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए उपस्थित वक्ताओं और गणमान्य जनों ने शक्तावत जी के क्षेत्र के अभूतपूर्व विकास, सामाजिक उत्थान और जनसेवा में दिए गए ऐतिहासिक योगदान को अत्यंत आदर के साथ याद किया। इस गरिमामय श्रद्धांजलि सभा की जीवंत झलकियाँ और तस्वीरें बुद्धि प्रकाश पाराशर खेरोदा द्वारा कैमरे में कैद की गईं, जिसमें खेरोदा के गुलाबनगर में स्व. गुलाब सिंह शक्तावत की जन्मतिथि पर भावुकता से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए जनसमूह को देखा जा सकता है। यह आयोजन शक्तावत जी के प्रति क्षेत्र की जनता के अटूट विश्वास और सम्मान का जीवंत प्रमाण बनकर उभरा।

