गुलाबचंद कटारिया पर लघु किसान बन सब्सिडी लेने का आरोप, पीएम को शिकायत
उदयपुर के अधिवक्ता ने पंजाब के राज्यपाल पर पद के दुरुपयोग और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री से जांच की मांग की।

तस्वीर में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया औपचारिक पोशाक में नजर आ रहे हैं।
पंजाब के महामहिम राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के विरुद्ध राजस्थान में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये की सब्सिडी हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। उदयपुर के पूर्व पार्षद और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. विजय विप्लवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण में पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, कटारिया ने संवैधानिक पद पर रहते हुए खुद को 'लघु एवं सीमांत किसान' की श्रेणी में दर्शाकर वित्तीय लाभ प्राप्त किया है, जो न केवल नैतिक रूप से संदिग्ध है बल्कि प्रशासनिक नियमों का खुला उल्लंघन भी प्रतीत होता है।
शिकायत का मुख्य केंद्र उदयपुर की झाड़ोल तहसील के वेलनिया गांव में स्थित गुलाबचंद कटारिया का फार्म हाउस है। डॉ. विप्लवी ने दस्तावेजों के हवाले से बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान राजस्थान सरकार से राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एन.एच.एम.) के तहत इस फार्म हाउस पर ग्रीन हाउस स्थापना के लिए कुल 22,12,358 रुपये की लागत दिखाई गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस लागत पर उन्हें 17,04,528 रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी प्रदान की गई, जो कुल निवेश का 77.04 प्रतिशत है। नियमानुसार, यह राशि निर्धारित अधिकतम अनुदान सीमा से 7.5 प्रतिशत अधिक है, जो सीधे तौर पर राजकोष को चूना लगाने का मामला बनता है।
इस पूरे प्रकरण का सबसे विवादास्पद पहलू कटारिया का 'लघु एवं सीमांत किसान' होने का दावा है। राजस्थान सरकार के पोर्टल के अनुसार, 2.5 बीघा जमीन वाला व्यक्ति सीमांत और 5 बीघा तक वाला लघु किसान माना जाता है, जिन्हें 70 प्रतिशत तक अनुदान देय है। वहीं सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए यह सीमा मात्र 50 प्रतिशत है। डॉ. विप्लवी का आरोप है कि राज्यपाल कटारिया के पास वेलनिया में ही 33 बीघा से अधिक भूमि है और कैलाशपुरी में भी लगभग 10 बीघा कृषि भूमि उनके स्वामित्व में है। ऐसे में 43 बीघा के मालिक होने के बावजूद उन्हें लघु किसान का प्रमाण पत्र कैसे जारी किया गया, यह विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
पत्र में राज्यपाल के राजनीतिक और पेशेवर जीवन पर भी सवाल उठाए गए हैं। डॉ. विप्लवी ने तर्क दिया है कि 82 वर्षीय कटारिया, जो पेशे से अध्यापक और अधिवक्ता रहे हैं और पिछले 50 वर्षों से सक्रिय राजनीति में रहकर 29 वर्षों तक कैबिनेट मंत्री जैसी सुविधाओं का लाभ ले चुके हैं, वे अचानक सरकारी रिकॉर्ड में 'गरीब लघु किसान' कैसे बन गए? यह तथ्य न केवल हास्यास्पद है बल्कि उन करोड़ों आम नागरिकों के साथ भी अन्याय है जिन्होंने प्रधानमंत्री के आह्वान पर स्वेच्छा से अपनी गैस सब्सिडी तक छोड़ दी थी।
शिकायतकर्ता ने कटारिया के पुराने विवादों की सूची भी प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की है। इसमें उदयपुर के बड़ी क्षेत्र में वन भूमि पर बसे भूखंडों का संदिग्ध क्रय-विक्रय, कैलाशपुरी फार्म हाउस की रजिस्ट्री के दौरान स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए मुख्य हाईवे से दूरी की गलत जानकारी देना और सबसे गंभीर रूप से कोरोना काल के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन का उल्लंघन कर उदयपुर से झाड़ोल जाकर फार्म हाउस की रजिस्ट्री करवाना शामिल है। साथ ही, जनप्रतिनिधि कोटे से रियायती दर पर जयपुर और उदयपुर में चार-चार आवास आवंटित कराने के मामले को भी पद के प्रभाव का दुरुपयोग बताया गया है।
इस विस्तृत शिकायत के माध्यम से डॉ. विजय विप्लवी ने मांग की है कि गुलाबचंद कटारिया को जारी लघु एवं सीमांत किसान प्रमाण पत्र की निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि यह प्रमाण पत्र सही पाया जाता है, तो कटारिया को 'राजस्थान सामाजिक सुरक्षा लघु एवं सीमांत वृद्धजन कृषक सम्मान पेंशन नियम, 2019' के तहत पेंशन का लाभ भी दिया जाना चाहिए, ताकि व्यवस्था की विडंबना पूरी तरह स्पष्ट हो सके। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, जिससे संवैधानिक पदों की शुचिता और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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