32 वर्षों से अटूट आस्था का सफर: 75 वर्षीय श्रद्धालु लगातार पैदल कर रहे माता वैष्णो देवी की यात्रा, खेरवाड़ा में हुआ भव्य स्वागत
गुजरात के जामनगर निवासी 75 वर्षीय श्रद्धालु पिछले 32 वर्षों से लगातार माता वैष्णो देवी की पैदल यात्रा कर रहे हैं। खेरवाड़ा पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। जानिए उनकी अटूट आस्था और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी।

खेरवाड़ा में माता वैष्णो देवी की पैदल यात्रा पर निकले जामनगर के 75 वर्षीय बुजुर्ग 'दादा' (केंद्र) का स्वागत करते भाजपा महिला मोर्चा की नयना पंचोली (दाएं) और लक्ष्मण प्रजापत (बाएं)।
आस्था, संकल्प और आत्मनिर्भरता का एक अद्भुत उदाहरण इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। गुजरात के जामनगर निवासी 75 वर्षीय श्रद्धालु, जिन्हें श्रद्धालु प्रेमपूर्वक "दादा" के नाम से जानते हैं, पिछले 32 वर्षों से लगातार माता वैष्णो देवी की पैदल यात्रा कर रहे हैं। उनकी यह अनवरत धार्मिक यात्रा न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण की मिसाल भी बन गई है।
गुरुवार को खेरवाड़ा स्थित पंचोली हॉस्पिटल के समीप उनके आगमन पर स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा की जिला मंत्री नयना पंचोली, लक्ष्मण प्रजापत सहित अन्य नागरिकों ने उनका अभिनंदन करते हुए उनकी धार्मिक निष्ठा और वर्षों से जारी तपस्वी यात्रा की सराहना की।
जानकारी के अनुसार, दादा अपनी संपूर्ण यात्रा पूर्णतः आत्मनिर्भर होकर करते हैं। वे किसी भी प्रकार की दान-दक्षिणा अथवा आर्थिक सहायता स्वीकार नहीं करते। भोजन, आवास और यात्रा से संबंधित सभी खर्च वे स्वयं वहन करते हैं। उनकी सादगी, अनुशासन और अटूट श्रद्धा यात्रा मार्ग में मिलने वाले श्रद्धालुओं एवं आमजन के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
यात्रा के दौरान गुरुवार रात्रि उनका विश्राम बंजारिया में रहा। रात्रि विश्राम के उपरांत शुक्रवार को उन्होंने अपने अगले पड़ाव के लिए प्रस्थान किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने उनकी मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए माता वैष्णो देवी के जयघोष लगाए और उनके संकल्प को नमन किया।
75 वर्ष की आयु में भी निरंतर पैदल यात्रा कर रहे इस श्रद्धालु का समर्पण यह दर्शाता है कि सच्ची आस्था और दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने उम्र कभी बाधा नहीं बनती। उनकी यात्रा श्रद्धा, आत्मविश्वास और संकल्प की एक प्रेरक मिसाल के रूप में लोगों के बीच संदेश दे रही है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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