नगर के मुख्य आराध्य देव ठाकुर गोपालराय जी के राजमहल के पास स्थित मंदिर में निर्जला एकादशी के अवसर पर परंपरा के अनुसार गर्भगृह को पूरी तरह पानी से भर दिया गया। मंदिर आने वाले दर्शनार्थियों ने बताया कि गर्भगृह में भरा गया पानी एकादशी से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक यथावत रखा जाता है।

मंदिर का इतिहास लिखने वाले इतिहासकार डॉ. जमनेश कुमार ओझा तथा नियमित दर्शनार्थी दीपक शर्मा ने बताया कि मंदिर की बनावट विज्ञान एवं उत्कृष्ट वास्तुशास्त्र के अनुरूप है। उनके अनुसार मंदिर की शिखर ध्वजा वर्षा का अनुमान बताती है, जबकि गर्भगृह में भरा पानी अतिवृष्टि अथवा सामान्य वर्षा के संकेत देता है। गर्भगृह में पानी का स्तर घटना वर्षा की कमी का संकेत माना जाता है।

डॉ. ओझा ने बताया कि ज्येष्ठ मास में प्रचंड गर्मी के दौरान गर्भगृह में पानी भरने की परंपरा का धार्मिक आधार भी है। उनका कहना है कि भक्त भगवान को गर्मी से बचाने के उद्देश्य से गर्भगृह को पानी से भरते हैं। उन्होंने बताया कि ठाकुर गोपालराय जी बाल स्वरूप में विराजमान हैं, इसलिए उनकी पूजा-अर्चना और श्रृंगार भी ऋतु के अनुसार किया जाता है।

मंदिर के वर्तमान पुजारी ने बताया कि निर्जला एकादशी के दिन गर्भगृह में भरा गया पानी अभी तक यथावत है और उसके स्तर में कोई कमी नहीं आई है। इसे इस वर्ष सामान्य से अच्छी बरसात होने का संकेत माना जा रहा है। धार्मिक आस्था, परंपरा और स्थानीय मान्यताओं से जुड़ी यह परंपरा आज भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती है।

Pratahkal Bureau

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