गोगुंदा: 'अब राजनीति नहीं, काम चाहिए'—राजतिलकस्थली की दुर्दशा पर करणी सेना का आर-पार की जंग का ऐलान
गोगुंदा में महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक राजतिलकस्थली की बदहाली पर श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत ने प्रशासन को अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि खंडहर में तब्दील हो रहे इस गौरवशाली स्थल का पुनर्निर्माण जल्द न हुआ तो निर्णायक आंदोलन होगा। जानिए इस उपेक्षा की पूरी रिपोर्ट।

गोगुंदा। मेवाड़ की वीर धरा और शौर्य के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक राजतिलकस्थली गोगुंदा आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। विश्वभर में स्वाभिमान का संदेश देने वाले इस पावन स्थल की उपेक्षा ने अब समाज के सब्र का बांध तोड़ दिया है। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व को अंतिम चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि महाराणा प्रताप के नाम पर राजनीति का दौर अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि शीघ्र ही इस खंडहर में तब्दील होती विरासत का कायाकल्प नहीं हुआ, तो एक निर्णायक जन-आंदोलन का आगाज होगा।
गोगुंदा में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा अपने समस्त पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ ऐतिहासिक राजतिलकस्थली पहुंचे। यहाँ स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा जिला अध्यक्ष का भव्य स्वागत किया गया, लेकिन जैसे ही टीम ने मुख्य परिसर में प्रवेश किया, वहां का दृश्य देख सभी के चेहरों पर आक्रोश और पीड़ा उभर आई। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि महाराणा प्रताप की प्रतिमा अत्यंत जर्जर अवस्था में है; प्रतिमा का रंग पूरी तरह उजड़ चुका है और पूरा परिसर किसी खंडहर जैसा प्रतीत हो रहा है।
इस गंभीर स्थिति पर कड़ा प्रहार करते हुए अर्जुन सिंह चुंडावत ने सीधे राजतिलकस्थली से एक वीडियो संदेश जारी कर प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल दी। उन्होंने बताया कि संगठन ने दो माह पूर्व उदयपुर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या से अवगत कराया था। पर्यटन विभाग को भी लिखित रूप में प्रतिमा के संरक्षण और स्थल के विकास हेतु पत्र भेजा गया था। विभागीय कागजों में प्रकरण जयपुर मुख्यालय तक पहुंचा और कलेक्टर द्वारा जवाब-तलबी भी हुई, लेकिन धरातल पर वास्तविकता 'शून्य' बनी हुई है। प्रशासन की यह उदासीनता यह दर्शाती है कि उनके लिए इतिहास के इन स्वर्णिम पन्नों की कोई कीमत नहीं है।
अर्जुन सिंह चुंडावत ने तीखे शब्दों में कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ की थाती नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव हैं। उनकी प्रतिमा और इस ऐतिहासिक स्थल की ऐसी दुर्गति करना राष्ट्र के आत्मसम्मान का अपमान है। उन्होंने उन राजनेताओं को भी आड़े हाथों लिया जो महाराणा प्रताप के नाम का उपयोग केवल वोटों की फसल काटने के लिए करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन किसी भी दल—चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस—के विरुद्ध नहीं है, लेकिन जो भी प्रताप का नाम लेगा, उसे उनके सम्मान और विरासत के संरक्षण के लिए काम करके दिखाना होगा।
करणी सेना ने अपनी इस चेतावनी को अंतिम अल्टीमेटम बताते हुए प्रशासन को चेताया है कि यदि तत्काल प्रभाव से प्रतिमा का पुनर्स्थापन और राजतिलकस्थली के स्थायी विकास का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना सर्व समाज को साथ लेकर सड़कों पर उतरेगी। इस संभावित उग्र और निर्णायक आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी। यह केवल एक स्मारक की सुरक्षा की बात नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उस गौरवशाली इतिहास को जीवंत रखने का संकल्प है जिसे शासन की लापरवाही मिटाने पर तुली है।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
