जेंडर समानता और माहवारी स्वच्छता पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, 50 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया भाग
खेरवाड़ा के भोमटा वाड़ा क्लस्टर में सीएमएफ संस्था और राजीविका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण में जेंडर समानता और माहवारी स्वच्छता पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। जानिए कैसे यह पहल समुदाय में बदलाव की नई दिशा दे रही है।

उदयपुर के भोमटावाड़ा पंचायत भवन में 22-23 जून 2026 को जेंडर समानता और माहवारी स्वच्छता प्रबंधन कार्यशाला के समापन पर उपस्थित ट्रेनर्स, सीएमएफ टीम और राजीविका की प्रतिभागी महिलाएं।
महिलाओं के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत पंचायत भवन भोमटा वाड़ा क्लस्टर में 22 और 23 जून को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सीएमएफ संस्था एवं राजीविका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशिक्षण में क्लस्टर स्तरीय महासंघ स्टाफ, कार्यकारिणी सदस्य, सामुदायिक समन्वयक, पोषण सखी, ग्राम संगठन सदस्य, व्यवसाय सुविधा प्रदाता, लेखाकार तथा अन्य सामुदायिक कार्यकर्ता शामिल रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य जेंडर समानता और माहवारी स्वच्छता प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर जागरूकता विकसित करना और समुदाय स्तर पर सकारात्मक बदलाव के लिए नेतृत्व तैयार करना था।
दो दिवसीय प्रशिक्षण का संचालन जतन संस्थान की प्रशिक्षक डॉ. उषा चौधरी, मोनिका शर्मा एवं राजदीप सिंह ने किया। वहीं सीएमएफ संस्था की माहवारी स्वच्छता प्रबंधन प्रभारी नियति सक्सेना ने भी प्रतिभागियों को विषय से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं। कार्यक्रम के दौरान सीएमएफ संस्था के पंकज अग्रवाल, राजेश मीणा, सुखलाल परमार, एडविन, वर्षा एवं धनराज भी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस जेंडर समानता विषय पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। इनमें महिला एवं पुरुष की सामाजिक भूमिकाओं, लैंगिक असमानताओं, निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी तथा समान अवसरों के महत्व पर चर्चा की गई। समूह गतिविधियों और संवाद आधारित सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को जेंडर आधारित भेदभाव के सामाजिक प्रभावों और उससे उत्पन्न चुनौतियों के बारे में जागरूक किया गया।
दूसरे दिन का प्रशिक्षण माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर केंद्रित रहा। “चुप्पी तोड़ो, शर्म तोड़ो” और शरीर मानचित्रण जैसी सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक एवं भावनात्मक परिवर्तनों की जानकारी दी गई। साथ ही माहवारी को एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करने और इससे जुड़े मिथकों व संकोच को दूर करने का संदेश दिया गया।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को अपने-अपने समुदायों में जेंडर समानता और माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को ज्ञानवर्धक, उपयोगी और व्यवहारिक बताते हुए इसकी सराहना की। यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।

Pratahkal Bureau
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