उदयपुर (कार्यालय संवाददाता)। झीलों की नगरी उदयपुर में बुधवार शाम कार्तिक पूर्णिमा का पावन अवसर एक अद्भुत दृश्य का साक्षी बना। पिछोला झील के किनारे स्थित ऐतिहासिक गणगौर घाट पर हजारों दीपों की रौशनी झिलमिलाने लगी जब महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ दीपदान किया। हवा में तैरती दीपों की लहरें जैसे आस्था की भाषा बोल रही थीं और झील का जल मानो स्वयं दिव्यता में नहाया हुआ प्रतीत हो रहा था।

इस अवसर पर सुबह से ही गणगौर घाट पर धार्मिक उत्साह देखने को मिला। पूरे कार्तिक महीने तक पूजा-अर्चना में लीन रहीं महिलाओं ने पूर्णिमा के दिन विशेष विधि-विधान से पूजा कर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आराधना की। पूजा के उपरांत महिलाओं ने कागज, गत्ते और लकड़ी की छोटी-छोटी नावें बनाईं, उनमें दीप जलाए और मनोकामनाओं के साथ झील में प्रवाहित किए। झील की लहरों पर तैरते इन दीपों ने ऐसा दृश्य रचा कि हर आंख श्रद्धा से भर उठी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान करने से समस्त पाप नष्ट होते हैं और पूरे वर्ष के पुण्य की प्राप्ति होती है। इस विश्वास के साथ महिलाएं पारंपरिक परिधान में सजी-धजी गणगौर घाट पर पहुंचीं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

जैसे ही सूरज ढला और झील पर अंधकार का आवरण छाने लगा, वैसे ही दीपों की कतारों ने पूरे घाट को रोशन कर दिया। हर दिशा से आती मंत्रोच्चारण की ध्वनि और दीपों की लहराती रोशनी ने वातावरण को आध्यात्मिकता से भर दिया। उदयपुर की इस सांस्कृतिक परंपरा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि झीलों का यह शहर केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक आस्थाओं का भी प्रतीक है।

Pratahkal Bureau

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