उदयपुर। जिले के माण्डव थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग से दुष्कर्म के बाद उसे कुंवारी मां बनाकर उसका नवजात बच्चा छीनकर बेच दिया गया। इस अमानवीय कृत्य का खुलासा तब हुआ जब माण्डव थाना पुलिस ने महाराष्ट्र से एक महिला को गिरफ्तार किया, जो इस मानव तस्करी गिरोह का हिस्सा बताई जा रही है।

मामले की जांच करते हुए पुलिस ने ठाणे (महाराष्ट्र) निवासी शीतल राहुल काकड़े को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया और मंगलवार को पोक्सो-1 कोर्ट में पेश किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे 6 नवम्बर तक रिमांड पर रखने के आदेश दिए हैं। रिमांड अवधि में पुलिस उस चिकित्सक की तलाश में जुटी है, जिसे शीतल ने यह बच्चा आगे बेचने की बात कबूल की है।

घटना का सिलसिला

मामला तब शुरू हुआ जब कोटड़ा के डिप्टी राजेन्द्र सिंह को एक पिता ने रिपोर्ट सौंपी। उसने बताया कि उसकी 15 वर्षीय पुत्री जब जंगल में लकड़ियां लेने गई थी, तभी झांझर माण्डवा निवासी सरदीराम पुत्र इंदा बुमड़िया ने उसे चाकू दिखाकर धमकाया और दो बार दुष्कर्म किया। आरोपी ने जान से मारने की धमकी देकर उसे चुप रहने पर मजबूर कर दिया। पीड़िता के गर्भवती होने के बाद परिजन उसे गुजरात के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां 11 अगस्त को उसका प्रसव कराया गया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। बच्चे के जन्म के दो दिन बाद यानी 13 अगस्त को आरोपी सरदीराम का भाई मुकेश बुमड़िया अपनी पत्नी सुमी और काका बतिया के साथ पीड़िता के घर पहुंचा। उन्होंने परिवार पर लाठियों से हमला किया और नाबालिग के दूधमुंहे बच्चे को जबरन छीनकर ले गए।

परिवार ने 17 अगस्त को फिर से माण्डवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की कार्रवाई नगण्य रही। यह लापरवाही इतनी गंभीर थी कि बाद में पुलिस अधीक्षक ने तत्कालीन माण्डवा थानाधिकारी को निलंबित कर दिया।

गैंग का खुलासा और गिरफ्तारी की कड़ी

जांच के दौरान पता चला कि मुकेश बुमड़िया ने बच्चे को दलपत रावल निवासी रावला वास चाटवाड़ा, गुजरात को बेच दिया। पुलिस ने दलपत को गिरफ्तार किया तो उसने खुलासा किया कि उसने नवजात को ठाणे निवासी शीतल राहुल काकड़े को बेचा था। शीतल ने पूछताछ में यह स्वीकार किया कि उसने बच्चा खरीदा और फिर उसे डॉक्टर सचिन लोखंडे को बेच दिया।

अब पुलिस डॉक्टर सचिन लोखंडे के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी करने की तैयारी में है ताकि यह पता लगाया जा सके कि दूधमुंहा बच्चा आखिर कहां है। पुलिस का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान बच्चे की लोकेशन और उसे बेचने की पूरी चेन का खुलासा किया जाएगा।

न्याय की उम्मीद और पुलिस कार्रवाई

यह मामला न केवल मानवता को झकझोर देने वाला है बल्कि पुलिस तंत्र की लापरवाही को भी उजागर करता है। नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए पुलिस अब सक्रिय रूप से कार्रवाई में जुटी है। उम्मीद की जा रही है कि रिमांड अवधि के दौरान बच्चे को बरामद कर इस घिनौने कारोबार में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा

Pratahkal Bureau

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