खेरोदा, 09 दिसंबर 2025।

उदयपुर जिले में यूरिया खाद की आपूर्ति और डीलिंग को लेकर बढ़ती अव्यवस्थाओं ने अंततः खाद विक्रेताओं को प्रशासन के दरवाज़े पर दस्तक देने को मजबूर कर दिया है। मेवाड़ एग्री इनपुट डीलर्स एसोसिएशन ने जिला कलेक्टर को एक विस्तृत पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि कृषि विभाग के अधिकारी अवैध शर्तें थोप रहे हैं, जिसके कारण डीलरों का व्यापार प्रभावित हो रहा है और किसानों को भी समय पर खाद नहीं मिल पा रही है।

एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष अरविंद कुमार जैन द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में दावा किया गया कि कृषि विभाग के अधिकारी डीलरों पर ‘डीलिंग न करने’ जैसी अनुचित और मनमानी शर्तें लगा रहे हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि डीएपी, बीज या अन्य उर्वरक उत्पादों की अनिवार्य खरीद के बदले ही यूरिया देने की शर्तें रखी जा रही हैं, जिसे एसोसिएशन ने “टाई-अप डीलिंग” बताते हुए पूरी तरह अवैध करार दिया है। डीलरों का कहना है कि ऐसा दबाव न केवल कानून के विपरीत है, बल्कि किसानों को परोक्ष रूप से महंगी और अनावश्यक खरीद के लिए मजबूर करता है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि डीलिंग रोकने के कारण निजी डीलरों को यूरिया का आवंटन लगातार कम हो रहा है, जबकि ग्राम सेवा सहकारी समितियों के सचिवों को कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में अधिक यूरिया दिया जा रहा है। एसोसिएशन ने इसे खुली पक्षपातपूर्ण नीति बताते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था से निजी खाद विक्रेताओं का व्यापार ठप्प होने की कगार पर पहुंच गया है।

एसोसिएशन के सचिव रामचंद मेहलाना ने कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई डीलर वैध दस्तावेजों के साथ बिना किसी कमीशन या ब्याज के किसानों को खाद उपलब्ध करा रहा है, तो उसे डीलिंग से रोकने का कोई औचित्य नहीं है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान नहीं होने पर उदयपुर जिले के सभी उर्वरक विक्रेता दुकानें बंद कर सामूहिक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

इस ज्ञापन पर एसोसिएशन के कई पदाधिकारियों और सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं। प्रशासन की अगली कार्रवाई अब जिले में खाद वितरण व्यवस्था के भविष्य को तय करेगी।

Pratahkal Bureau

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