फतहनगर: श्रीमद्भागवत कथा में गूंजी गुरु महिमा की दिव्य वाणी, सोमवार को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा ज्ञान यज्ञ
मावली गांव में आयोजित कथा के 29वें दिन गुरु महिमा का वर्णन हुआ। सोमवार को हवन और पोथी यात्रा के साथ अनुष्ठान पूर्ण होगा।

मावली गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु और कथावाचिका अन्नू ब्राह्मणी। यह आयोजन माहेश्वरी समाज के तत्वावधान में किया जा रहा है।
मावली गांव में माहेश्वरी समाज के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ इन दिनों भक्ति और आध्यात्मिकता की अनूठी आभा बिखेर रहा है। रविवार को कथा के 29वें दिन का वातावरण भगवान दत्तात्रेय के उपदेशों से अभिसिंचित हो उठा। कथावाचिका अन्नू ब्राह्मणी ने यदु राजा को दिए गए भगवान दत्तात्रेय के उन उपदेशों का मार्मिक चित्रण किया, जिनमें उन्होंने प्रकृति और संसार से प्राप्त 24 गुरुओं को अंगीकार कर जीवन का सार समझाया है।
अपने प्रवचन के दौरान कथावाचिका ने आध्यात्मिक उत्थान में सद्गुरु की अनिवार्य भूमिका पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार सांसारिक शिक्षा के लिए शिक्षक का मार्गदर्शन आवश्यक है, उसी प्रकार भगवद् प्राप्ति और जीवन को सार्थक दिशा देने के लिए एक समर्थ सद्गुरु का सानिध्य अपरिहार्य है। गुरु की महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने दोहे के माध्यम से श्रद्धालुओं को भवसागर से पार उतरने हेतु गुरु का आश्रय लेने का संदेश दिया।
आयोजन समिति के अनुसार, इस आध्यात्मिक अनुष्ठान का भव्य समापन सोमवार को होगा। कार्यक्रम की रूपरेखा के अंतर्गत दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक अंतिम सत्र की कथा संपन्न होगी, जिसके तुरंत बाद दोपहर 2:10 बजे विधि-विधान से हवन आयोजित किया जाएगा। पूर्णाहुति के उपरांत भक्तजन हरिनाम संकीर्तन के साथ भव्य पोथी यात्रा निकालेंगे। यह यात्रा मुख्य बाजार से होती हुई रावला चौक स्थित श्री ठाकुर लक्ष्मीनारायण भगवान मंदिर पहुंचेगी, जहां पोथी विश्राम के साथ आयोजन को विराम दिया जाएगा और अंत में प्रसाद वितरण किया जाएगा।
इस आयोजन में रमेश इनाणी, बसंतीलाल लावटी, गोविंद देवपुरा, ओमप्रकाश देवपुरा, रामनरेश, रूपलाल समधानी, घनश्याम, हरीश, जगदीश, राजू, विनोद शर्मा समेत समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वहीं, ममता, भावना, सीमा, कांता, राधा, सावित्री, माया, बबली और नीलम सहित नारायणी सखियों की उपस्थिति ने भक्ति भाव को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया। इस आयोजन की सफलता न केवल धार्मिक अनुशासन को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय समुदाय के बीच व्याप्त सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता को भी जीवंत करती है।

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