फतहनगर में भीषण गर्मी का प्रकोप, तापमान 42 डिग्री पहुंचने से जनजीवन प्रभावित
फतहनगर में पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा, अभिभावकों ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा हेतु प्रशासन से समय परिवर्तन और बुनियादी सुविधाओं की मांग की।

फतहनगर (प्रात:काल संवाददाता)। फतहनगर क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रचंड असर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे समूचे क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है। सूर्यदेव के तीखे तेवरों के कारण तापमान में रोजाना हो रही बढ़ोतरी ने आमजन के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सोमवार को फतहनगर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में पारा 41 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर गया और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। सुबह से ही शुरू होने वाली तेज धूप और झुलसाने वाली गर्म हवाओं ने नागरिकों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं, जिससे दोपहर होते-होते गर्मी का स्तर असहनीय सीमा तक पहुंच गया।
इस भीषण तपिश का सीधा असर स्थानीय व्यापार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बाजारों में दोपहर के वक्त चहल-पहल पूरी तरह नदारद नजर आ रही है। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, चिलचिलाती धूप के कारण दोपहर में ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और केवल शाम ढलने के बाद ही बाजारों में कुछ रौनक लौटती है। वर्तमान मौसमी परिस्थितियों में सबसे अधिक कष्टकारी स्थिति स्कूली बच्चों की बनी हुई है। सुबह विद्यालय जाते समय ही बच्चों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं छुट्टी के समय चलने वाली लू और प्रचंड धूप के कारण नन्हे बच्चों को घर लौटने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए छोटे बच्चों के अभिभावकों ने गहरी चिंता व्यक्त की है और प्रशासन से स्कूल समय में तत्काल कटौती करने की पुरजोर मांग की है। अभिभावकों का तर्क है कि मौसम की गंभीरता को देखते हुए स्कूलों का संचालन सुबह जल्दी शुरू कर समय पूर्व छुट्टी दी जानी चाहिए ताकि मासूमों को लू की चपेट में आने से बचाया जा सके। अभिभावकों ने स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग से गुहार लगाई है कि स्कूलों के समय में परिवर्तन के साथ-साथ विद्यालयों में शीतल पेयजल, पंखों की सुचारू कार्यप्रणाली और छायादार पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। क्षेत्र में बढ़ती गर्मी के इस दौर ने अब प्रशासन की सतर्कता और जनसुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

