फतेहनगर। धार्मिक आस्था और अटूट भक्ति के केंद्र फतेहनगर में छाक मनोरथ उत्सव अत्यंत श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। वल्लभकुल परंपरा के ध्वजवाहक पूज्यपाद गोस्वामी 105 श्री हरिरायजी बावाश्री (नाथद्वारा-इंदौर) के गरिमामयी आगमन ने इस संपूर्ण आयोजन को दिव्यता प्रदान की, जिससे स्थानीय वैष्णव समाज में हर्ष और उत्साह का संचार हो गया।

उत्सव का शुभारंभ गोस्वामी श्री हरिरायजी बावाश्री के सनवाड़ स्थित श्री पशुपतिनाथ निराश्रित पशु सेवा समिति प्रांगण में पदार्पण के साथ हुआ। यहाँ उपस्थित वैष्णवों और गौभक्तों ने बावाश्री का भव्य स्वागत एवं सम्मान किया। जयकारों की गूंज के बीच भक्तों ने श्रद्धापूर्वक उनका अभिनंदन किया और उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात बावाश्री श्री राधेश्याम खंडेलवाल के निज प्रतिष्ठान पर पधारे, जो इस उत्सव का मुख्य केंद्र रहा।

इस विशेष अवसर पर नगर के विभिन्न वैष्णव परिवारों ने अपने-अपने गृह मंदिर से ठाकुर जी को बड़े ही भाव के साथ आयोजन स्थल पर पधाराया। ठाकुर जी का छाक मनोरथ पारंपरिक रीति-रिवाजों, शास्त्रीय पद्धति और गहन भक्तिभाव के साथ पूर्ण किया गया। संपूर्ण परिसर भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की स्वर लहरियों से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रभु की सेवा कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की और अंत में प्रसादी वितरण के साथ उत्सव का लाभ लिया। भारी जन-उपस्थिति के बीच संपन्न हुआ यह मनोरथ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसने समाज में एकता, सेवा और भक्ति की जड़ों को और अधिक सुदृढ़ किया है।

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