फतहनगर सहकारी समिति परिसर शनिवार सुबह किसानों से खचाखच भर गया, जब यूरिया खाद वितरण की खबर क्षेत्र में तेजी से फैली। सोशल मीडिया और स्थानीय संदेशों के माध्यम से सूचना फैलते ही किसान सुबह होते-होते समिति पहुंचने लगे, और कुछ ही समय में हालात इतने बिगड़ गए कि परिसर के बाहर तक 100 फीट लंबी कतारें बन गईं। महिलाओं के लिए अलग कतार बनाई गई, जबकि पुरुषों की लाइन लगातार बढ़ती रही।

यूरिया खाद की लंबे समय से चल रही कमी के बीच किसानों को शनिवार को कुछ राहत मिली। समिति द्वारा आधार कार्डधारी प्रत्येक किसान—चाहे महिला हो या पुरुष—को दो बैग यूरिया खाद वितरित किए गए। इसके साथ ही एक एनपीके कृभको तरल जैव खाद की बोतल 175 रुपए में उपलब्ध कराई गई। यूरिया खाद के नीम लेपित इफको ‘भारत यूरिया’ 45 किलोग्राम के बैग को 267 रुपए की दर से दिया गया।

दोपहर 2 बजे तक वितरण चलता रहा, लेकिन भीड़ इतनी अधिक थी कि कई किसानों को लाइन में घंटों खड़ा रहना पड़ा। कतार संभालने के प्रयासों के बावजूद वृद्ध किसानों को थकान से बीच-बीच में वहीं जमीन पर बैठकर आराम करना पड़ा। दूसरी ओर, कई किसान अपने परिवार के सदस्यों और परिचितों के साथ आए ताकि अधिक बैग हासिल कर सकें। टेंपो, मेटाडोर, कार, मोटरसाइकिल और स्कूटर पर खाद के बैग लादकर ले जाते किसानों की लंबी कतारें पूरे दिन नजर आईं।

दुर्भाग्य से जो किसान देर से पहुंचे, उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा क्योंकि सीमित स्टॉक दोपहर तक समाप्त हो गया। पिछले कई दिनों से यूरिया की किल्लत के कारण किसान निजी दुकानों से ऊंची दरों पर खाद खरीदने को मजबूर हो रहे थे, ऐसे में शनिवार का वितरण उनके लिए बड़ी उम्मीद लेकर आया, भले ही हर व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही बैग मिल पाए।

फतहनगर में खाद की इस होड़ ने क्षेत्र में कृषि संकट की गहराई को उजागर किया है और यह भी दिखाया कि समय पर सरकारी आपूर्ति किसानों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

Pratahkal Bureau

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