डूंगरपुर। आदिवासी जनाधिकार संगठनों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने डूंगरपुर जिले में आईटीआई भवन निर्माण को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। रामसागड़ा गांव में स्वीकृत आईटीआई भवन निर्माण के लिए खसरा संख्या बदलकर जालुकुआ मौजा में फर्जी एनओसी जारी किए जाने का मामला सामने आया है।

आदिवासी जनाधिकार एकामंच राजस्थान और सामाजिक कार्यकर्ता यशवंत कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत जालुकुआ में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान सत्र 2023 में आईटीआई कॉलेज रामसागड़ा में स्वीकृत हुआ था। इस भूमि पर भवन बनने से इलाके के विद्यार्थियों को लाभ मिलने वाला था। लेकिन कुछ लोगों की निजी रचनाओं और राजनीतिक दबाव के चलते खसरा संख्या बदलकर जालुकुआ मौजा में स्थानांतरित कर दी गई।

स्थानीय आरोपों के अनुसार, सरपंच सविता देवी और निवर्तमान सचिव मगनीराम अहारी ने प्रशासन और नेताओं के इशारों पर वार्ड पंचों के हस्ताक्षर लेकर फर्जी कोरम बैठक आयोजित की और एनओसी जारी कर दी। यह जमीन वर्षों से आदिवासी काश्तकार की खेती और निवास का मुख्य साधन रही है। जमीन पर मकान भी बना हुआ है और परिवार का जीवन इसी भूमि पर निर्भर है।

ग्रामीणों और वार्ड पंचों ने इस अनियमित कार्रवाई पर तीखी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना जमीन हस्तांतरण करना न केवल गैरकानूनी है बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दबाव का स्पष्ट संकेत है। रामसागड़ा थाने में करीब 15 दिन पहले सरपंच और सचिव के खिलाफ परिवाद दर्ज किया गया था, लेकिन पुलिस प्रशासन पंचायती राज का हवाला देकर अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक दबाव के चलते उठ रहे विवादों को उजागर करता है। स्थानीय आदिवासी समुदाय और सामाजिक संगठनों की चिंता है कि अगर इस तरह की कार्रवाई रोकी नहीं गई, तो शिक्षा संस्थानों के लिए निर्धारित भूमि का दुरुपयोग और सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है।

Pratahkal Bureau

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