मावली (उदयपुर)। मावली की धरा पर जब गीतों की चाशनी और गज़लों की गहराई एक साथ घुली, तो सर्द फिजाओं में भी एक जादुई गर्माहट महसूस की गई। उदयपुर के सुप्रसिद्ध 'शायराना परिवार' द्वारा वर्ष 2026 के स्वागत में आयोजित जिला स्तरीय 'नव वर्ष स्नेह-मिलन समारोह' ने मावली के फतहनगर रोड स्थित होटल तुलसी पैलेस में एक ऐसी शाम रची, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। सुबह 11 बजे से ही सुरमई शुरुआत के साथ इस भव्य कार्यक्रम ने न केवल संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि साहित्य और कला के प्रति अटूट प्रेम का एक नया उदाहरण पेश किया।

कार्यक्रम का संयोजन विख्यात अभिनेता, ओजस्वी कवि और वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र त्रिपाठी द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी कुशलता से कला के इस महाकुंभ को एक सूत्र में पिरोया। मकर संक्रांति के पावन पर्व की पृष्ठभूमि में आयोजित इस गरिमामयी समारोह की अध्यक्षता मेवाड़ चैनल उदयपुर के छोगा लाल भोई ने की। कार्यक्रम में प्रशासनिक गौरव की उपस्थिति ने आयोजन की महत्ता को और बढ़ा दिया; मुख्य अतिथि के रूप में मावली उपखंड अधिकारी रमेश सीरवी और विशिष्ट अतिथि के तौर पर मावली पुलिस उप अधीक्षक आशिमा वासवानी ने शिरकत की। अधिकारियों ने कलाकारों के उत्साह की सराहना करते हुए कला और साहित्य को समाज का दर्पण बताया।

शायराना परिवार के इस मंच पर केवल उदयपुर ही नहीं, बल्कि चित्तौड़गढ़, कोटा, भीलवाड़ा, राजसमंद और जयपुर जैसे विभिन्न जिलों के करीब 50 मूर्धन्य कवियों और कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वातावरण तब भावुक हो गया जब गायकों ने देश के महानतम संगीत मनीषियों—मुकेश, किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोसले—के सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियाँ दीं। अपनी लेखनी और प्रस्तुति से बंसीलाल लड्डा 'कपासन', गुलजार चित्तौड़गढ़ी, दिनेश बोरीवाल, नरेन्द्र त्रिपाठी, सबीरा पलाना, अनुराधा माथुर, उत्पल नरेश चौहान और शकील अल्लाऊदीन ने साहित्य के विविध रंग बिखेरे। वहीं, अजीत सिंह खींची की गज़लों ने महफ़िल में रूहानियत भर दी।

गीत-संगीत की इस गौरवमयी धारा में सीमा शर्मा, उषा जोशी, अशोक परिमल और मनीष चौबिसा ने अपने कंठ से माधुर्य घोला। साथ ही, अनु जोशी, वरिष्ठ पत्रकार सुशील वैष्णव, शिरिष माथुर, सन्जू, मदन महेश्वरी, केशव आमेटा, धनंजय त्रिपाठी और विशाल साहु जैसे कई उत्साही संगीत साधकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के हर जीवंत पल को उदयपुर अलर्ट चैनल के वरिष्ठ पत्रकार नरेश कहार ने अपने कैमरे में सहेजा। अंततः, इस स्नेह-मिलन ने यह सिद्ध कर दिया कि साहित्य और कला का संगम किसी भी भौगोलिक सीमा को लांघकर दिलों को जोड़ने की शक्ति रखता है, जिससे मावली का यह आयोजन राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का एक अहम अध्याय बन गया।

Pratahkal Newsroom

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