डूंगरपुर। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के लगातार बढ़ते घातक एवं हानिकारक प्रभावों के बीच प्राकृतिक खेती को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से वमासा स्थित राधा कृष्ण गौशाला में एक विशाल किसान सम्मेलन एवं जैविक कृषि प्रशिक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया गया। 'गौ सेवा गतिविधि', 'ग्राम विकास गतिविधि' और 'भारतीय किसान संघ' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में प्रगतिशील किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने भारी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने उपस्थित कृषकों को गोपालन तथा प्राकृतिक खेती के दूरगामी महत्व से विस्तारपूर्वक अवगत कराया और इसे वर्तमान समय की महती आवश्यकता बताया।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित गोपाल सुथारिया सहित कई अन्य प्रगतिशील किसानों ने मंच से अपने जीवंत अनुभव साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोपालन और प्राकृतिक खेती को अपनाकर पेस्टीसाइड, यूरिया एवं डीएपी जैसे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से पूरी तरह बचा जा सकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा ने अपने संबोधन में देशी गाय की उपयोगिता पर विशेष बल देते हुए कहा कि देशी गाय एवं उसके गोबर के उचित प्रयोग से मानव जीवन में शारीरिक और आर्थिक रूप से अत्यंत सकारात्मक व क्रांतिकारी परिवर्तन संभव हैं। उन्होंने इस प्रकार के सम्मेलनों को समाज में व्यापक जागरूकता फैलाने का एक बहुत बड़ा और सशक्त माध्यम करार दिया।

कृषि विकास और कृषक कल्याण की दिशा में सरकारी प्रयासों को रेखांकित करते हुए विधायक शंकरलाल डेचा ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा की गई एक बड़ी और विशेष घोषणा का भी प्रमुखता से उल्लेख किया। इस सरकारी योजना के तहत बैल से खेती करने वाले सीमांत किसानों को ₹30,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। सरकार के इस कदम से क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती की विधा को अपनाने के लिए एक नई ऊर्जा, संबल और मजबूत प्रेरणा मिलेगी। यह सम्मेलन क्षेत्र में पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित होगा।

Pratahkal HQ

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