डूंगरपुर के जोगपुर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का सत्संग संपन्न
तीन दिवसीय आध्यात्मिक समागम में साध्वी कनकेश्वरी भारती और साध्वी निलेषा भारती ने जीवन प्रबंधन व भक्ति के महत्व पर दिया मार्गदर्शन।

डूंगरपुर। ग्राम जोगपुर में आयोजित तीन दिवसीय सत्संग समारोह के दौरान श्रद्धा और आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान डूंगरपुर शाखा के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आध्यात्मिक समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान की प्रखर वक्ताओं ने जीवन प्रबंधन, राष्ट्र निर्माण और आत्मिक शांति के गूढ़ रहस्यों को उजागर करते हुए जनमानस को भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान डूंगरपुर शाखा की साध्वी कनकेश्वरी भारती ने स्वामी विवेकानंद के कालजयी विचारों को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्र और समाज सुधार की शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान करते हुए कहा कि जब व्यक्ति सुधरता है तो घर सुधरता है, और जब घर सुधरता है तो गांव सुधरता है। इसी तरह गांव के सुधरने से अंततः देश सुधरता है। इसलिए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सर्वप्रथम खुद को सुधारने की नितांत आवश्यकता है।
इसी क्रम में कथा व्यास साध्वी निलेषा भारती ने श्रोताओं को भक्ति की महिमा समझाते हुए कहा कि प्रभु की कथा बड़े ही दुर्लभ संयोग से प्राप्त होती है, इसलिए ईश्वर की पावन कथा को पूर्ण एकाग्रता के साथ श्रवण करना चाहिए। संत कबीर दास जी की अमूल्य वाणी की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि इंसान के भीतर केवल एक ही मन है; अब यह पूर्णतः मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह उस मन को अच्छे कार्यों व भक्ति में लगाए या फिर विकारों की ओर ले जाए। उन्होंने भक्ति को परिभाषित करते हुए कहा कि भक्ति का वास्तविक अर्थ परमात्मा से जुड़ना है, और जो व्यक्ति सच्चे मन से भक्ति करता है, उसका मन हमेशा शांत रहता है।
साध्वी निलेषा भारती ने समय की महत्ता पर बल देते हुए सचेत किया कि कल और काल में ज्यादा अंतर नहीं है, इसलिए किसी भी कार्य को कल के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए और आज से ही भक्ति की शुरुआत कर देनी चाहिए। भक्ति हमें बंधनों से मुक्त कर स्वतंत्र करती है। वर्तमान मानवीय प्रवृत्ति पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भगवान को तो मानता है, किंतु भगवान की कही बातों को नहीं मानता। इंसान आज अपनी मनमर्जी से भक्ति कर रहा है और यही उसके दुखों का मूल कारण है। तीन दिनों तक चले इस सत्संग ने संपूर्ण क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया, जिसका गहरा प्रभाव उपस्थित जनसमुदाय पर स्पष्ट रूप से देखा गया।

