राजस्थान की राजनीति में उस समय नया उबाल आ गया जब पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी ने पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया को एक पत्र लिखकर उनके सार्वजनिक वक्तव्यों और संवैधानिक पद की गरिमा पर कड़े प्रहार किए। जोशी ने यह पत्र कटारिया द्वारा हाल ही में मीडिया और सोशल मीडिया पर उनके विरुद्ध दी गई टिप्पणियों के प्रत्युत्तर में लिखा है। पत्र की शुरुआत में जोशी ने स्पष्ट किया कि पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी द्वारा कटारिया के उदयपुर में बार-बार प्रशासनिक हस्तक्षेप और जनसुनवाई को लेकर राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र पर कटारिया का व्यवहार तथ्यात्मक होने के बजाय भ्रामक और व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित रहा है। जोशी ने कटारिया के पांच दशकों के परिचय का हवाला देते हुए उनकी कार्यशैली को 'शिष्टाचारिक कृपणता' और 'राजनीतिक चातुर्य' का मिश्रण करार दिया।

धर्मनारायण जोशी ने पत्र में बिंदुवार तरीके से कटारिया के दावों का खंडन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2008, 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में कटारिया ने उनके विरुद्ध षडयंत्र रचे और टिकट कटवाने के लिए हस्ताक्षर अभियान तक चलवाया। जोशी ने दावा किया कि 2008 में मावली से उनकी हार के पीछे कटारिया और उनके अनुयायियों का भीतरघात प्रमुख कारण था, बावजूद इसके उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा और 2018 में संभाग में सर्वाधिक मतों से जीत दर्ज की। उन्होंने कटारिया की उस पीड़ा पर भी तंज कसा जिसमें उन्होंने जोशी द्वारा मावली सीट छोड़ने पर सवाल उठाए थे। जोशी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हारकर नहीं बल्कि जीतकर और स्थानीय कार्यकर्ताओं को अवसर देने के उद्देश्य से सीट छोड़ी थी।

पत्र में भ्रष्टाचार और अनैतिकता के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। जोशी ने फरवरी 2023 में कटारिया के असम राज्यपाल पद के शपथ ग्रहण समारोह का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके परिजनों और समर्थकों की गौहाटी यात्रा का लगभग 20.31 लाख रुपये का व्यय उदयपुर जिले के चार जनजाति विधायकों के यात्रा मद से वहन किया गया। इसमें विधायक फूल सिंह मीणा, अमृत लाल मीणा, बाबू लाल खराड़ी और प्रताप गमेती का नाम शामिल है। जोशी ने इसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों के विपरीत और वित्तीय अनैतिकता का उदाहरण बताया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 1998 के चुनाव कोष में लाखों की शेष राशि के गबन के कथित प्रयास और उदयपुर के 272 भूखंड घोटाले में कटारिया की चुप्पी को 'अघोषित समर्थन' करार दिया।

संवैधानिक मर्यादाओं के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए जोशी ने कहा कि राज्यपाल जैसे पद पर होने के बावजूद कटारिया उदयपुर में भाजपा की कोर कमेटी की बैठकें ले रहे हैं और प्रशासनिक अधिकारियों को मौखिक निर्देश दे रहे हैं। उन्होंने कटारिया द्वारा महाराणा प्रताप पर दिए गए विवादित बयान और उसके बाद मांगी गई माफी का स्मरण कराते हुए उनकी वाणी के असंयम पर भी सवाल उठाए। जोशी ने आरोप लगाया कि कटारिया ने सदैव स्वयंसेवक होने का ढोंग किया, जबकि कई अवसरों पर उन्होंने संघ और विचार परिवार के निर्देशों की अवहेलना की। अंत में जोशी ने लिखा कि कटारिया का चेहरा अब बेनकाब हो चुका है और उनके द्वारा किया जा रहा शक्ति प्रदर्शन उनके अपराध बोध को ही दर्शाता है।

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