धरियावद। धरियावद वन विभाग के प्रादेशिक रेंज द्वारा बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित वन्य जीव गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। वाटर होल पद्धति के आधार पर की गई इस गणना में वन क्षेत्र की जैव विविधता की एक भव्य तस्वीर उभर कर सामने आई है। उप वन संरक्षक सुरेश अग्रवाल एवं सहायक वन संरक्षक विक्रम सिंह के कुशल मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान के तहत वन विभाग के कार्मिकों ने मचानों पर बैठकर लगातार 24 घंटों तक वन्यजीवों की गतिविधियों और उनकी अठखेलियों को बारीकी से रिकॉर्ड किया। प्रादेशिक रेंज वन अधिकारी रामलाल भील ने बताया कि इस महत्वपूर्ण कार्य हेतु क्षेत्र के 26 चयनित जलाशयों पर विशेष निगरानी रखी गई थी, जिसमें धरियावद, आरामपुरा, पहाड़ा, खुंता, मुंगाना, पारसोला, भबराना और झड़ोली नाका जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र शामिल रहे।

इस गणना अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कुल 53 प्रहरियों की तैनाती की गई थी, जिनमें वन विभाग के 24 अनुशासित वनकर्मी और वन सुरक्षा समिति के 29 समर्पित सदस्य शामिल थे। वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए विभाग ने स्पष्ट किया है कि गणना हेतु जंगलों में निर्मित किए गए ऊंचे मचानों को कार्य पूर्ण होते ही तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया ताकि प्राकृतिक आवास में कोई मानवीय हस्तक्षेप शेष न रहे।

आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि इस बार धरियावद के जंगलों में लंगूरों का भारी दबदबा रहा है, जिनकी संख्या सर्वाधिक 855 दर्ज की गई। प्रकृति प्रेमियों के लिए सबसे सुखद और उत्साहजनक पहलू दुर्लभ उड़न गिलहरी और पेंगोलिन की उपस्थिति रही, जो क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र की सुदृढ़ता का प्रमाण है। गणना के दौरान दर्ज किए गए अन्य प्रमुख वन्यजीवों में 305 मोर, 206 रोजड़ा (पैंथर), 135 जंगली मुर्गी, 134 सियार और 78 जंगली सूअर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 24 चिंकारा, 19 बिज्जू, 18 जरख, 8 सेही, 4 लोमड़ी, 4 चौसिंगा, 2 पेंगोलिन और 1 दुर्लभ उड़न गिलहरी की आधिकारिक पुष्टि की गई है। वन्यजीवों की यह विविध उपस्थिति न केवल पर्यटन की दृष्टि से बल्कि पर्यावरण संतुलन की दिशा में भी एक सकारात्मक संकेत प्रदान करती है।

Pratahkal HQ

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