उदयपुर में विकास बना काल: सोलर लाइन के लिए खोदे गए 'मौत के गड्ढों' में समाईं दो गायें, तड़प-तड़पकर तोड़ा दम
उदयपुर जिले के वल्लभनगर स्थित फाचर गांव में सोलर लाइन के लिए खोदे गए खुले गड्ढों में गिरने से दो गायों की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। ठेकेदार द्वारा चारागाह भूमि पर गड्ढे खोदकर खुला छोड़ देने से यह हादसा हुआ, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीण राकेश आमेटा और विजय सिंह ने ठेकेदार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे और सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने सोलर प्रोजेक्ट के दौरान सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है।

उदयपुर: विकास की अनियंत्रित रफ़्तार और ठेकेदारों की घोर लापरवाही कभी-कभी बेजुबानों के लिए किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है, इसका एक खौफनाक मंजर उदयपुर जिले के वल्लभनगर उपखंड में देखने को मिला। यहाँ विकास के नाम पर खोदे गए गड्ढे 'मौत के कुएं' में तब्दील हो गए, जिनमें गिरकर दो गायों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने ढावा पंचायत के फाचर गांव में हड़कंप मचा दिया है और आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन व ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
घटना वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र के ढावा पंचायत स्थित फाचर गांव की है, जहाँ सौर ऊर्जा के विस्तार के नाम पर चल रहे निर्माण कार्य ने एक त्रासदी का रूप ले लिया। जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में सोलर की हाई टेंशन लाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है, जिसके तहत आसपास के गांवों में लोहे के विशाल पोल लगाए जा रहे हैं। इसी क्रम में फाचर गांव की सरकारी चारागाह भूमि पर ठेकेदार द्वारा जेसीबी मशीनों से गहरे गड्ढे खुदवाए गए थे। दुर्भाग्यवश, सुरक्षा मानकों को ताक पर रखते हुए ठेकेदार ने इन जानलेवा गड्ढों को खुला छोड़ दिया, जिससे यह हादसों को खुला निमंत्रण देने लगे। गड्ढे अत्यधिक गहरे होने के कारण इनमें भूमिगत जल का रिसाव हो गया और आसपास की जमीन दलदली होकर धंसने लगी, जिसने एक अदृश्य मौत के जाल का रूप ले लिया।
शनिवार को जब गांव के पालतू पशु हमेशा की तरह चारागाह भूमि पर चरने गए, तो घास चरते-चरते दो गायें उस धंसती हुई जमीन की चपेट में आ गईं और सीधे पानी से भरे गहरे गड्ढों में जा गिरीं। गड्ढों में पानी और दलदल होने के कारण गायें बाहर नहीं निकल सकीं और काफी देर तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद डूबने से उनकी मौत हो गई। घटना की खबर जंगल में आग की तरह फैली और देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीण राकेश आमेटा, विजय सिंह और दुदाराम मेघवाल ने बताया कि यह हादसा सीधे तौर पर ठेकेदार की लापरवाही का नतीजा है, जिसने चारागाह भूमि पर मौत के ये गड्ढे खोदकर उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया था।
आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर ही ठेकेदार और कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर कड़ी मशक्कत करके रस्सियों और अन्य संसाधनों की मदद से दोनों गायों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और बेजुबान दम तोड़ चुके थे। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की है कि लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके साथ ही, पीड़ित पशुपालक को हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआवजे की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई है। यह घटना सवाल खड़ा करती है कि आखिर विकास कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खामियाजा बेजुबान कब तक अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
