फतहनगर। डबोक स्थित गीतांजली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज (गिट्स) के सभागार में शुक्रवार को मावली एवं खेमली ब्लॉक के प्रधानाचार्यों की दो दिवसीय सत्रांत वाक्पीठ का गरिमामय शुभारंभ हुआ। गिट्स डायरेक्टर एस.के. प्रसन्ना के मुख्य आतिथ्य एवं वाक्पीठ अध्यक्ष उमेश माहेश्वरी की अध्यक्षता में आयोजित इस समागम का मूल ध्येय विद्यार्थियों को संस्कारों से सिंचित कर शैक्षिक धरातल को सुदृढ़ बनाना रहा। कार्यक्रम में पी.के. जैन, श्रीमती आशा सोनी, राजस्थान अंबेडकर शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. खेमराज कड़ेला, जिला अध्यक्ष गौतम तिरगर, राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के चन्द्रशेखर चौधरी एवं डाइट प्राचार्य शीला कहाल्या बतौर मंचासीन अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का श्रीगणेश छगनलाल मेनारिया द्वारा प्रस्तुत ईश वंदना एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात मनोज समदानी, भानसिंह राव, ईन्दु हाड़ा, निधि तथा भूपेन्द्र हाड़ा ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। वाक्पीठ अध्यक्ष उमेश माहेश्वरी ने स्वागत उद्बोधन में जानकारी दी कि इस संगोष्ठी में कुल 79 प्रधानाचार्य सहभागिता कर रहे हैं। उन्होंने सत्र के दौरान जिले में उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम अर्जित करने पर मावली व खेमली ब्लॉक के प्रधानाचार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प को सिद्ध करने हेतु शिक्षा के क्षेत्र में पूर्ण समर्पण से जुटने का आह्वान किया।

उद्घाटन सत्र में तकनीकी और मानसिक संबल पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जहाँ गिट्स डायरेक्टर एस.के. प्रसन्ना ने रोबोटिक्स के युग में शिक्षा की प्रासंगिकता पर वार्ता प्रस्तुत की, वहीं पी.के. जैन ने मोटिवेशनल उद्बोधन के जरिए शैक्षिक ऊर्जा का संचार किया। डाइट प्राचार्य श्रीमती शीला कहाल्या ने आगामी प्रवेशोत्सव को लेकर रणनीतिक चर्चा करते हुए नामांकन के विशाल लक्ष्य की प्राप्ति हेतु शिक्षकों को प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों से सतत संपर्क साधने और बच्चों को मोबाइल के भ्रमजाल से बचाकर उन्हें आदर्शों व संस्कारों से जोड़ने को एक पावन कर्म की संज्ञा दी।

सत्र के उत्तरार्ध में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। द्वितीय सत्र में कैलाश सिंह रावल ने 'समस्याओं का समाधान टेक्नोलॉजी के साथ' विषय पर सारगर्भित विचार रखे। इस दौरान मंच पर आरपी पंकज जोशी, सुरेश देशबंधु और महावीर प्रसाद जैन की गरिमामयी उपस्थिति रही। संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन सचिव प्रदीप सिंह नेगी ने किया। यह वाक्पीठ न केवल शैक्षिक विमर्श का केंद्र बनी, बल्कि आगामी सत्र के लिए नवीन ऊर्जा और विजन प्रदान करने में भी सफल रही।

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