खेरोदा में उमड़ा जनसैलाब: मनरेगा के वजूद पर मँडराते संकट के खिलाफ प्रीति शक्तावत ने भरी हुंकार, केंद्र और राज्य सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
खेरोदा में पूर्व विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत के नेतृत्व में 'मनरेगा बचाओ महासंग्राम' के तहत विशाल पैदल मार्च निकाला गया। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून बदलने के विरोध में उमड़े इस जनसैलाब ने मोदी सरकार और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जानें कैसे वल्लभनगर कांग्रेस ने किसान और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

मेवाड़ की राजनीति में उस वक्त एक नया उबाल देखने को मिला जब खेरोदा पंचायत की गलियां 'मनरेगा बचाओ' के नारों से गूंज उठीं। पूर्व विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत के नेतृत्व में आयोजित इस 'मनरेगा बचाओ महासंग्राम' ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। खेरोदा मंडल और भोपाखेड़ा में आयोजित इस विशाल पैदल मार्च ने न केवल ग्रामीणों की एकजुटता को प्रदर्शित किया, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून में किए जा रहे संभावित बदलावों के खिलाफ एक निर्णायक जंग का बिगुल भी फूंक दिया है। ढोल-नगाड़ों की थाप और कार्यकर्ताओं के जोश के बीच यह प्रदर्शन महज एक रैली नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले मनरेगा को बचाने की एक गंभीर छटपटाहट के रूप में उभरा।
जैसे ही पूर्व विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत खेरोदा बस स्टैंड पहुंचीं, वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और आमजन ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद रैली सदर बाजार, होली चौक और अमरपुरा रास्ता होते हुए माताजी मंदिर तक पहुंची, जहां एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए शक्तावत ने सीधा हमला बोला। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि केंद्र की मोदी सरकार मनरेगा जैसे सशक्त कानून को कमजोर कर गरीब ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों पर कुठाराघात कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार केवल योजनाओं के नाम बदलकर वाहवाही लूटने में मशगूल है, जबकि हकीकत में किसान, मजदूर और श्रमिक वर्ग इस शासन में सबसे अधिक पीड़ित और उपेक्षित महसूस कर रहा है। शक्तावत ने दोटूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव करने की अपनी मंशा को तुरंत वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी और आने वाले समय में एक विशाल जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
इस शक्ति प्रदर्शन और जनजागरण अभियान में वल्लभनगर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चन्द्रेश मेनारिया और मंडल अध्यक्ष दिनेश जनवा ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। खेरोदा नगर कांग्रेस अध्यक्ष भेरूलाल पाराशर, पूर्व नगर अध्यक्ष गणेश गिरी गोस्वामी और पूर्व सरपंच पृथ्वीराज रावत सहित कई दिग्गज नेताओं ने भी सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की। पैदल मार्च के दौरान भंवर सिंह, वीरेंद्र सिंह पाटिया, उप सरपंच लक्ष्मीलाल जनवा, बगदी लाल मेघवाल, मुकेश चौबीसा, रामसिंह पुनिया और अजय प्रताप सिंह राठौड़ जैसे स्थानीय नेताओं ने ग्रामीणों के साथ कदम से कदम मिलाकर अपनी एकजुटता दिखाई।
भोपाखेड़ा में भी इस मुहिम को व्यापक समर्थन मिला, जहां सरपंच पृथ्वीराज रावत, रमेश सेन, कमल अहमद और पूर्व सरपंच भेरू लाल गाडरी के साथ भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। कार्यकर्ताओं की लंबी फेहरिस्त में चुन्नीलाल गाडरी, शंकर लाल गाडरी, मिट्ठू लाल गाडरी, रूपलाल रावत और डालचंद गाडरी सहित कई वरिष्ठ एवं युवा कार्यकर्ता अंत तक डटे रहे। खेरोदा से उठी यह विरोध की लहर अब आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन गई है, जो इस बात का संकेत है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ सकता है।

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