झाड़ोल। कड़ाके की ठंड और धुंधली सुबह के बीच झाड़ोल स्थित क्रय-विक्रय सहकारी समिति का परिसर आज अनियोजित व्यवस्थाओं की मार झेलते ग्रामीणों की बेबसी का गवाह बना। खाद वितरण और जरूरी कार्यों के लिए तड़के ही पहुंचे किसान, महिलाएं और बुजुर्ग निर्धारित समय पर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद में कतारों में खड़े रहे, लेकिन घड़ी की सुइयां आगे बढ़ती रहीं और अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।

सुबह 9 बजे से शुरुआत की घोषणा के बावजूद कार्यालय के बंद दरवाज़े और जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति ने ग्रामीणों का धैर्य तोड़ दिया। तेज ठंड के कारण कई लोग जमीन पर बैठकर या ओट की तलाश में इंतजार करते दिखाई दिए। महिलाएं बच्चों को संभालते हुए लाइन में अपनी जगह बनाए रखने की कोशिश करती रहीं, जबकि किसान बार-बार दूर तक सड़क पर निगाहें जमाकर अधिकारियों के आने की उम्मीद में खड़े रहे।

स्थानीय लोगों का कहना था कि सहकारी समिति में अक्सर निर्धारित समय में कार्य प्रारंभ नहीं होता, लेकिन आज हालात असुविधा की हद तक पहुंच गए। खाद वितरण जैसे अहम कार्यों से जुड़े सैकड़ों ग्रामीण अपनी दिनचर्या छोड़कर सुबह-सुबह यहां पहुंचे थे, पर व्यवस्था की कमी ने उन्हें घंटों ठिठुरती ठंड में रहने को मजबूर कर दिया।

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से समयबद्ध सेवा, पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानियों से बचा जा सके। सुबह से शुरू हुआ इंतजार दोपहर तक बढ़ गया, और इसके साथ ही लोगों में असंतोष भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा।

झाड़ोल की यह घटना ग्रामीण सेवाओं में समयबद्धता और सुव्यवस्थित प्रबंधन की अनिवार्यता को एक बार फिर रेखांकित करती है, जो आमजन के हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Pratahkal Bureau

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