कुक कम हेल्पर संघर्ष समिति की संयुक्त बैठक में कुक कम हेल्परों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। बैठक में 24 से 26 अगस्त तक पोषाहार नहीं पकाने तथा खेरवाड़ा में पड़ाव डालने का निर्णय लिया गया।

कुक कम हेल्पर समिति के सलाहकार नाना भगत ने बताया कि कुक कम हेल्पर पिछले 4 साल से राज्य सरकार, केंद्र सरकार, राष्ट्रपति, राज्यपाल, राज्य तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और प्रशासन को पत्र देकर वेट बेगार से मुक्ति दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अब पोषाहार पकाने की सेवा बंद करने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे होने वाली असुविधा और किसी भी तरह की अनहोनी के लिए सरकार तथा प्रशासन जिम्मेदार होंगे।

कुक कम हेल्पर संघर्ष समिति की पार्वती ने बताया कि 28 जून 2026 को उपखंड अधिकारी को लिखित सूचना देकर चेतावनी दी गई थी कि एक माह के अंदर कुक की वाजिब मांगों पर सुनवाई शुरू नहीं हुई तो पोषाहार पकाना बंद करना पड़ेगा।

कुक प्रेमलता ने बताया कि सरकार और प्रशासन को दी गई यह मियाद गुजर चुकी है, लेकिन कुक कम हेल्पर को किसी भी तरह की राहत नहीं दी गई है। इसलिए कुक को पोषाहार पकाने का बहिष्कार करने और खेरवाड़ा में पड़ाव डालने का निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

कुक कम हेल्पर संघर्ष समिति कई वर्षों से कम नामांकन का बहाना बनाकर सरकारी विद्यालयों को बंद करने पर रोक लगाने, कुक कम हेल्पर को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत कुशल श्रमिक की मजदूरी दिलाने, बाल गोपाल योजना के अंतर्गत दूध गरम करने का वेतन बढ़ाने और छुट्टियों का वेतन न काटकर 12 माह का वेतन देने की मांग कर रही है।

समिति की मांग है कि सभी कुक का बकाया वेतन तथा एक साल से ज्यादा समय से बकाया दूध गर्म करने का मानदेय दिलाया जाए। पानी और बर्तनों की समुचित व्यवस्था कराई जाए। कुक कम हेल्पर से पोषाहार पकाने के अलावा बाथरूम और कमरों की साफ-सफाई कराने, झाड़ू लगाने, स्कूल के ताले खोलने और लगाने तथा शिक्षकों की सेवा करने जैसे समस्त काम कराने पर रोक लगाई जाए अथवा इन अतिरिक्त कामों का अतिरिक्त भुगतान किया जाए।

इसके साथ ही दूध गर्म करने और पोषाहार का बकाया मानदेय दिलाने, प्रत्येक 50 विद्यार्थियों पर एक कुक लगाने, कुक कम हेल्पर का वेतन हर माह देने और वेतन कुक के बैंक खाते में जमा कराने की मांग भी की जा रही है। सभी कुक कम हेल्पर को नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और वर्दी देने तथा हाजिरी रजिस्टर रखने की मांग भी समिति की ओर से की गई है।

समिति का कहना है कि कुक कम हेल्पर अपनी मांगों और वेट बेगार से मुक्ति के लिए कई वर्षों से संघर्षरत हैं, लेकिन किसी ने कुक कम हेल्पर को वेट बेगार से मुक्ति दिलाने का प्रयास नहीं किया। इसी के चलते अब सांकेतिक रूप से तीन दिन तक पोषाहार नहीं पकाकर बहिष्कार करने और खेरवाड़ा में पड़ाव डालने का निर्णय लिया गया है।

Dharnendra Jain( Kherwara)

Dharnendra Jain( Kherwara)

नाम: धरणेन्द्र जैन

वर्तमान पद: सीनियर रिपोर्टर (प्रातः काल दैनिक, खेरवाड़ा विधानसभा)

कार्यक्षेत्र: खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (खेरवाड़ा, ऋषभदेव, और नयागांव उपखंड क्षेत्र, जिला उदयपुर, राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों की खबरें

अनुभव: 30 वर्ष से अधिक

परिचय 

धरणेन्द्र जैन उदयपुर जिले के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल दैनिक' में सीनियर रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मुख्य रूप से खेरवाड़ा, ऋषभदेव और नयागांव उपखंड क्षेत्र को कवर करते हैं। धरणेन्द्र जैन राजनीति, क्राइम, स्थानीय प्रशासन सहित क्षेत्र के सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

धरणेन्द्र जैन को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों (30 वर्ष) से अधिक का व्यापक और लंबा अनुभव है:

  • वह साल 1995 से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं।
  • उन्होंने वर्ष 1998 से 2018 तक लगातार 20 वर्षों तक 'दैनिक भास्कर' में खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए सीनियर रिपोर्टिंग की है।
  • वर्ष 2018 से वह लगातार 'प्रातः काल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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