खरीफ सब्जी उत्पादन और प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भरता की राह, 30 महिला किसानों ने लिया संकल्प
सीएमएफ संस्था द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 30 ग्रामीण महिला किसानों ने खरीफ सीजन की सब्जी उत्पादन तकनीकों और प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों की जानकारी ली।

खरीफ सब्जी उत्पादन एवं प्राकृतिक खेती विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सीएमएफ संस्था के प्रशिक्षकों के साथ प्राकृतिक खेती का सूचना चार्ट पकड़े खड़ीं प्रतिभागी महिला किसान।
ग्रामीण महिलाओं को खेती के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सीएमएफ संस्था द्वारा खरीफ सब्जी उत्पादन एवं प्राकृतिक खेती विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में 30 महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए उन्नत एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की और सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण उत्पादन बढ़ाने का संकल्प लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीएमएफ संस्था के प्रशिक्षक सुखलाल परमार, सचिन पटेल एवं साथी आशीष उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों को खरीफ मौसम की सब्जियों के उत्पादन की कार्य योजना, उन्नत एवं स्थानीय किस्मों के चयन, नर्सरी प्रबंधन, समय पर बुवाई, पौध संरक्षण तथा पोषण प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां विस्तार से दी गईं।
प्रशिक्षकों ने प्राकृतिक खेती के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत के उपयोग के साथ-साथ प्राकृतिक तरीके से कीट एवं रोग नियंत्रण के प्रभावी उपायों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उत्पादन लागत में कमी आती है और किसानों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण तथा टिकाऊ कृषि उत्पादन प्राप्त होता है।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि सब्जी उत्पादन महिला किसानों के लिए नियमित आय का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। मौसमी सब्जियों के चरणबद्ध उत्पादन से जहां परिवार की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित होती है, वहीं पूरे वर्ष नकद आय प्राप्त कर परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर महिला किसानों ने प्राकृतिक खेती आधारित सब्जी उत्पादन को अपनाने, गुणवत्तापूर्ण फसल उत्पादन बढ़ाने तथा कृषि को स्थायी आय के साधन के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया। यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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