इडलगीव फाउंडेशन के तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसल विविधीकरण, FPO की कार्यप्रणाली और मिश्रित खेती के गुर सिखाए।

भींडर उपखंड क्षेत्र के रायला गांव में स्थित 'अपना संस्थान' के भव्यधरा संदर्भ केंद्र पर इडलगीव फाउंडेशन के तत्वाधान में आयोजित जलवायु परिवर्तन किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम ने क्षेत्र के कृषि परिदृश्य में एक नई चेतना का संचार किया है। मौसम के बदलते मिजाज और कृषि संकट के इस दौर में आयोजित यह कार्यक्रम किसानों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है। कार्यक्रम का विधिवत शंखनाद परिचय एवं स्वागत सत्र से हुआ, जिसमें नारू लाल पदमेला एवं नवलराम रायला ने उपस्थित सभी संभागियों का आत्मीय स्वागत किया, जबकि कार्यक्रम का व्यवस्थित पंजीयन नारायण लाल नागलिया द्वारा संपन्न किया गया।

प्रशिक्षण के प्रथम चरण में प्रतिभागी किसानों ने अपने-अपने गांवों की भौगोलिक स्थिति और कृषि अनुभवों को साझा किया, जिससे क्षेत्र की कृषि समस्याओं की एक स्पष्ट तस्वीर उभरकर सामने आई। इस महत्वपूर्ण मंच पर जलवायु परिवर्तन की विभीषिका, खेती में आधुनिक नवाचार, मिश्रित खेती की अनिवार्यता और नकदी फसलों के आर्थिक महत्व पर अत्यंत गंभीर व विस्तृत मंथन किया गया। संस्थान के चन्द्र प्रकाश चौबीसा ने पूर्व में आयोजित प्रशिक्षण सत्रों की गहन समीक्षा प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन के मूल कारण क्या हैं और किस प्रकार यह हमारी रीढ़ यानी कृषि व्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। इसके पश्चात विषय विशेषज्ञ दीपक शर्मा ने उपस्थित कृषकों से खरीफ और रबी की फसलों के चक्र पर संवाद स्थापित किया तथा किसानों द्वारा चाव से बोई जाने वाली फसलों का एक विस्तृत चार्ट तैयार करवाया। विमर्श के दौरान यह चिंताजनक तथ्य सामने आया कि मौसम में आ रहे असामान्य बदलाव, अनियमित और अनिश्चित बारिश, लगातार बढ़ते तापमान तथा रातों में चलने वाली गर्म लू जैसी प्रतिकूल परिस्थितियां खेती को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं, जिससे निपटने के लिए अब मिश्रित खेती और फसल विविधीकरण को अपनाना ही एकमात्र विकल्प बचा है।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र को गति देते हुए कट्स संस्था से पधारे विशेषज्ञ मदन गिरि ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में अगर जीवित रहना है तो पारंपरिक ढर्रे को छोड़कर आधुनिक खेती को अपनाना ही होगा। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे केवल पारंपरिक फसलों के भरोसे न रहें, बल्कि तीनों मौसमों के अनुकूल तैयार की गई सूरजमुखी और मूंगफली जैसी महत्वपूर्ण फसलों का प्रयोग करें और नकदी फसलों की तरफ तेजी से कदम बढ़ाएं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाशंकर शर्मा के भगीरथ प्रयासों के चलते ही इस क्षेत्र के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले सूरजमुखी के बीज सुलभता से उपलब्ध हो सके हैं। इस पूरे आयोजन की विस्तृत रिपोर्टिंग किशन अहीर द्वारा की गई।

इसी कड़ी में कट्स संस्था की प्रतिनिधि गायत्री जी ने महिला सशक्तिकरण और कृषि के जुड़ाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी संस्था ग्रामीण महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है, साथ ही F.P.O. (किसान उत्पादक संगठन) के सशक्त माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों तथा व्यावसायिक खेती की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षण की सार्थकता को सिद्ध करते हुए स्थानीय किसान मोतीलाल ने अपना प्रत्यक्ष अनुभव साझा किया और बताया कि उन्होंने मक्का और उड़द की मिश्रित खेती का सफल प्रयोग कर पहले के मुकाबले कहीं बेहतर और बंपर उत्पादन प्राप्त किया है।

आयोजन के अंतिम और तकनीकी सत्र में माधव मेनारिया ने F.P.O. की संपूर्ण कार्यप्रणाली, इसके कानूनी व संगठनात्मक ढांचे और इससे किसानों को मिलने वाले प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभों की तकनीकी जानकारी देकर जागरूक किया। समापन वेला में संस्थान के संस्थापक चन्द्र प्रकाश चौबीसा ने भविष्य के रोडमैप को साझा करते हुए संकल्प दोहराया कि आगामी दिनों में भी जलवायु परिवर्तन और कृषि सुधारों को लेकर किसानों के साथ बैठकों और प्रशिक्षणों का यह दौर निरंतर जारी रहेगा। कार्यक्रम के सफल समापन पर सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों का आभार व धन्यवाद ज्ञापन दीपक चौबीसा द्वारा किया गया। पूरे कार्यक्रम को अपने कैमरे में जीवंत रूप से कैद करने तथा फोटो का कार्य बुद्धि प्रकाश पाराशर खेरोदा द्वारा संपन्न किया गया।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story