चित्तौड़गढ़: ग्राम पंचायतों में टेंडर घोटाले की शिकायत, रिकॉर्ड सीज
गंगरार और साड़ास सहित कई पंचायतों में नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को सामग्री आपूर्ति का ठेका देने और राजकोष को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है।

उपखंड मुख्यालय क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में अकाउंटेंट, सरपंच और ग्राम विकास अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को ताक में रखकर चहेते ठेकेदारों को वर्षों से मटेरियल सप्लाई के ठेके दिए जाने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद मामला जांच के घेरे में आ गया है और संबंधित रिकॉर्ड भी सीज किए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों पर लाखों रुपए कमीशन लेने के आरोप लगे हैं।
ठेकेदार भेरूलाल रेगर ने आरोप लगाया कि गंगरार, शादी, तुबंडिया और लालास ग्राम पंचायत सहित कई पंचायतों में पंचायत समिति के अकाउंटेंट, ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच केवल दिखावे के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी करते हैं, जबकि वास्तविक काम किसी अन्य व्यक्ति से कराया जाता है। उन्होंने कहा कि पंचायतों में नियमों को इस स्तर तक तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है कि उसकी कोई सीमा नहीं रह गई है।
रेगर ने विशेष रूप से साड़ास ग्राम पंचायत का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां पिछले पांच वर्षों से लगातार सरपंच प्रतिनिधि के रिश्तेदार को ही नियमों के विपरीत मटेरियल सप्लाई का ठेका दिया जा रहा है। उन्होंने पंचायत समिति के अकाउंटेंट पर आरोप लगाया कि 10 हजार रुपए लेकर मनमर्जी से किसी के नाम टेंडर जारी कर दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि लाखों रुपए के ठेके दिए जाने के बावजूद कई निविदा धारकों के पास न तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन है और न ही उन्होंने कभी जीएसटी रिटर्न भरा है। इतना ही नहीं, निविदा खोलने के दौरान नियमानुसार ठेकेदारों से अमानत राशि के डीडी भी जमा नहीं करवाए जाते, जिससे राजकोष को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
भेरूलाल रेगर ने बताया कि नियमानुसार 10 लाख से एक करोड़ रुपए तक की लागत वाली निविदाओं का प्रकाशन एक क्षेत्रीय दैनिक समाचार पत्र और एक राज्य स्तरीय अग्रणी दैनिक समाचार पत्र में किया जाना अनिवार्य है, लेकिन पंचायतों में इस नियम की भी खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इन अनियमितताओं से परेशान होकर अतिरिक्त जिला परिषद चित्तौड़गढ़ से लेकर जयपुर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत दर्ज करवाई गई है। रेगर का आरोप है कि अधिकारियों को लाखों रुपए कमीशन देने के बाद भी भुगतान नहीं कराया जाता। इसी से परेशान होकर उन्होंने पंचायत राज मंत्री Madan Dilawar, उपमुख्यमंत्री, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और संबंधित पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई है।
अब मामला सार्वजनिक होने के बाद पंचायतों में टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता, सरकारी नियमों की पालना और राजकोषीय नुकसान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

Pratahkal Bureau
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