राजस्थानी साहित्यकार छत्र छाजेड़ 'फक्कड़' को मिलेगा कृष्ण शंकर जोशी स्मृति साहित्य सम्मान
राजस्थानी साहित्यकार छत्र छाजेड़ 'फक्कड़' को 9 अगस्त को उदयपुर में कृष्ण शंकर जोशी स्मृति साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। जानिए उनकी साहित्यिक उपलब्धियां।

तस्वीर में वरिष्ठ राजस्थानी साहित्यकार छत्र छाजेड़ 'फक्कड़' नजर आ रहे हैं, जिन्हें इस वर्ष कृष्ण शंकर जोशी स्मृति राजस्थानी साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
राजस्थान के सरदारशहर मूल के एवं वर्तमान में दिल्ली प्रवासी वरिष्ठ राजस्थानी साहित्यकार छत्र छाजेड़ 'फक्कड़' को इस वर्ष कृष्ण शंकर जोशी स्मृति राजस्थानी साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान 9 अगस्त को त्रि सुगंधी साहित्य संस्थान, उदयपुर द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय साहित्यकार सम्मेलन में प्रदान किया जाएगा।
संस्थान की अध्यक्षा आशा पांडे ओझा ने बताया कि यह सम्मान खेरवाड़ा के झुंथरी निवासी स्वर्गीय कृष्ण शंकर जोशी की स्मृति में प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि छत्र छाजेड़ लंबे समय से हिंदी एवं राजस्थानी भाषा में पद्य और गद्य दोनों विधाओं में सक्रिय सृजन कर रहे हैं। व्यंग्य लेखन उनकी विशेष पहचान है तथा उनके सात राजस्थानी गीत संगीतबद्ध भी हो चुके हैं।
अब तक उनकी हिंदी और राजस्थानी में कुल 18 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें पांच हिंदी से राजस्थानी में अनूदित कृतियां भी शामिल हैं। उनकी प्रमुख राजस्थानी कृतियों में 'जे ईंया है तो है', 'दीखै बो ही बिकै', 'सलाहकार डॉट कॉम', 'मरू मांडणा', 'मणका (MRP)', 'गीतां रो गजरो', 'कांई लेख लिख्या बे माता', 'बगत रो फेर' तथा 'गीतां रो गुच्छो' उल्लेखनीय हैं। वहीं हिंदी में 'मन मंजरी', 'भाव प्रवाह', 'सोचना मना है' और 'इतै में घंटी बज गई' जैसी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
छाजेड़ की रचनाएं युगपक्ष (बीकानेर), बिणजारो, माणक, राजस्थली, हथाई और रूड़ो राजस्थान सहित अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी का 'राजस्थानी आगीवाण' सम्मान, सृजन साहित्य सम्मान, सरदारशहर गौरव सम्मान तथा कविवार रत्न अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
राजस्थानी साहित्य जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें कृष्ण शंकर जोशी स्मृति साहित्य सम्मान से सम्मानित किए जाने पर साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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