चेक अनादरण मामले में महिला कारोबारी को एक वर्ष कारावास
3 लाख रुपए उधार लेकर चेक बाउंस करने और भुगतान न करने पर कोर्ट ने एनआई एक्ट धारा 138 के तहत सजा सुनाई

उदयपुर। कृत्रिम आभूषण व्यवसाय के लिए उधार ली गई राशि के एवज में जारी चेक के अनादरण के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए महिला कारोबारी को एक वर्ष के कारावास और 4.50 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
प्रकरण के अनुसार अनुराधा पत्नी निकेश, निवासी न्यू नवरत्न कॉम्पलेक्स, रूचिका मार्ट के पास, फतहपुरा ने कल्पना पत्नी शशांक, निवासी आई रोडए, भूपालपुरा, हाल प्रभात नगर सेक्टर 5 के खिलाफ अधिवक्ता संजय कोठारी के माध्यम से कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया। परिवाद में बताया गया कि आरोपिया ने अपने कृत्रिम आभूषण व्यवसाय के लिए जनवरी 2017 में परिवादिया से 3 लाख रुपए उधार मांगे। इस पर परिवादिया ने 14 फरवरी 2017 को 3 लाख रुपए उधार दिए। आरोपिया ने छह माह बाद राशि लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन लंबे समय तक भुगतान नहीं किया।
लगातार तकाजा करने पर आरोपिया ने पुनर्भुगतान के लिए 1 नवम्बर 2017 का चेक दिया। उक्त चेक को भुगतान हेतु बैंक में प्रस्तुत किया गया, लेकिन 29 दिसम्बर 2020 को जारी बैंक अभिलेख में “भुगतान रोक दिया गया है” का उल्लेख करते हुए चेक अनादरित कर दिया गया। इसके बाद परिवादिया के अधिवक्ता ने 4 फरवरी 2021 को नोटिस जारी किया, बावजूद इसके राशि वापस नहीं की गई।
मामले में दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट एनआई एक्ट केस क्रम 6 की पीठासीन अधिकारी शिखा शर्मा ने अभियुक्ता कल्पना पत्नी शशांक को दोषी करार दिया। कोर्ट ने एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत एक वर्ष के कारावास और 4.50 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
यह फैसला चेक अनादरण मामलों में न्यायिक सख्ती को रेखांकित करता है और वित्तीय लेन-देन में जवाबदेही की आवश्यकता को स्पष्ट करता है।

