प्राकृतिक खेती से चंपा देवी की बदली किस्मत, सब्जी बेचकर अब रोज हो रही आय
राजस्थान के खेरवाड़ा की चंपा देवी ने रसायनों को छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाई। जीवामृत के उपयोग से लागत कम हुई और सब्जी उत्पादन से अब उन्हें नियमित आय मिल रही है।

तस्वीर में महिला किसान चंपा देवी खेरवाड़ा स्थित अपने खेत में ताजी भिंडी से भरी टोकरी लिए खड़ी नजर आ रही हैं।
खेरवाड़ा: परंपरागत कृषि की सीमित आय से जूझ रहे एक आदिवासी परिवार के लिए प्राकृतिक खेती वरदान साबित हुई है। यह सफलता की गाथा है नयागांव ब्लॉक के पहाड़ा (खराड़ीवाड़ा) गाँव की निवासी महिला किसान चंपा देवी और उनके स्वर्गीय पति दिता जी डामोर के परिवार की, जिन्होंने खेती के पारंपरिक ढर्रे को बदलकर आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी है। चंपा देवी आज न केवल अपने परिवार का संबल बनी हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन गई हैं।
चंपा देवी का परिवार पूर्व में केवल मौसमी फसलों पर निर्भर था, जिससे प्राप्त आय घर की आवश्यकताओं और बच्चों की शिक्षा के लिए अपर्याप्त थी। इस कठिन दौर में ग्रामीण आजीविका और टिकाऊ कृषि के लिए कार्यरत संस्था 'सीएमएफ' (CMF) ने उन्हें प्राकृतिक खेती की दिशा दिखाई। संस्था द्वारा चंपा देवी को न केवल विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया, बल्कि तकनीकी मार्गदर्शन और फील्ड स्तर पर निरंतर सहयोग भी दिया गया।
संस्था से मिले प्रोत्साहन के बाद चंपा देवी ने रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों का पूर्णतः त्याग कर दिया। उन्होंने अपने खेत में भिंडी, बैंगन और मिर्च की फसलें उगाईं और उनके स्थान पर घर में ही निर्मित जीवामृत, घनजीवामृत तथा नीमास्त्र का उपयोग शुरू किया। इस परिवर्तन का परिणाम यह हुआ कि खेती की लागत नगण्य रह गई और मिट्टी की उर्वरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। सीएमएफ के फील्ड स्टाफ ने नियमित रूप से खेत का दौरा कर फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण और कुशल सिंचाई तकनीकी पर मार्गदर्शन दिया, जिससे सब्जियों की गुणवत्ता उत्कृष्ट बनी और फसलों को रोगों से सुरक्षा मिली।
इस बदलाव ने चंपा देवी के परिवार के लिए दैनिक आय का एक स्थायी माध्यम सुनिश्चित कर दिया है। भिंडी, बैंगन और मिर्च की सतत तुड़ाई के कारण वे अब स्थानीय बाजार में प्रतिदिन ताजी सब्जियां बेच रही हैं। जहाँ पहले सीजन के अंत में एकमुश्त आय प्राप्त होती थी, वहीं अब दैनिक आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। चंपा देवी की यह यात्रा यह सिद्ध करती है कि सही मार्गदर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्राकृतिक खेती एक मुनाफे वाला व्यवसाय बन सकती है। सीएमएफ संस्था और चंपा देवी का यह सहयोग आज पूरे क्षेत्र में टिकाऊ कृषि और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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