उदयपुर। सरकारी विद्यालय की ऑडिट रिपोर्ट में लगे आक्षेपों को हटाने और सही रिपोर्ट तैयार करने के बदले फोन पे के माध्यम से 12 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में भौतिक सत्यापन (ऑडिट) विभाग के तत्कालीन सहायक प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में चार्जशीट पेश कर दी गई है। एसीबी की इस कार्रवाई के बाद विभागीय अनियमितताओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि ब्रह्मपुरी कानोड निवासी भूपेंद्र कुमार जोशी ने ब्यूरो में परिवाद दर्ज कराया था। जोशी ने बताया कि चतुर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानोड में खेलकूद सामग्री की ऑडिट और स्काउट जम्बूरी, रोहट (पाली) में छात्रों के शिविर खर्च के लिए विद्यालय द्वारा दिए गए 15 हजार रुपये के समायोजन को लेकर कथित तौर पर आरोप लगाए गए थे। इन आक्षेपों को हटाने और रिपोर्ट को सही दर्ज करने के बदले तत्कालीन सहायक प्रशासनिक अधिकारी चंद्रमोहन गोस्वामी ने 12 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी, जिसे फोन पे के माध्यम से लिया गया।

शिकायत की पुष्टि के बाद एसीबी ने प्रकरण दर्ज कर गोस्वामी के खिलाफ जांच शुरू की। जांच के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित पाए गए, जिसके बाद कोष एवं लेखा विभाग, राजस्थान जयपुर के निदेशक से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई। पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने पर आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला सिद्ध होने पर पुलिस निरीक्षक डॉ. सोनू शेखावत ने विशिष्ट न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम क्रम संख्या 1, उदयपुर की अदालत में चार्जशीट प्रस्तुत की।

एसीबी की इस कार्रवाई ने न केवल विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता पर जोर दिया है, बल्कि शिक्षा से जुड़े संवेदनशील वित्तीय मामलों में भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता के सरकारी रुख को भी स्पष्ट किया है। अब अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई को लेकर सभी की नजरें टिक गई हैं।

Pratahkal Bureau

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