खेरोदा | 02 जनवरी, 2026

मेवाड़ अंचल के खेरोदा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकृति के रौद्र रूप ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शुक्रवार की सुबह जब क्षेत्रवासियों की आंखें खुलीं, तो पूरा इलाका सफेद घने कोहरे की चादर में लिपटा हुआ मिला। दृश्यता (विजिबिलिटी) शून्य के करीब पहुंच जाने के कारण न केवल यातायात प्रभावित हुआ, बल्कि कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं ने आमजन की धूजणी छुड़ा दी। आलम यह रहा कि सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ हो गए और समूचा क्षेत्र ठिठुरन की आगोश में समा गया।

शीतलहर के इस सितम ने खेरोदा की रफ्तार पर जैसे ब्रेक लगा दिया है। कस्बे के हृदय स्थल सदर बाजार से लेकर होली चौक, गांधी चौक और बस स्टैंड जैसे व्यस्ततम इलाकों में सन्नाटा पसरा रहा। बर्फीली हवाओं के तीखे तेवरों के कारण व्यापारी वर्ग ने भी प्रतिष्ठान देरी से खोले, वहीं ग्रामीण अति आवश्यक कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकलते देखे गए। सड़कों पर वाहन चालकों को भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा; घने कोहरे के कारण दिन में भी हेडलाइट्स जलाकर रेंगते हुए वाहनों ने मौसम की गंभीरता को बयां किया।

इस भीषण प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में अब ग्रामीणों के लिए 'अलाव' ही एकमात्र सहारा सिद्ध हो रहे हैं। सुबह से ही मोहल्लों और प्रमुख चौराहों पर लोग टोलियां बनाकर आग तापते नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि बीते दो-तीन दिनों में तापमान में आई भारी गिरावट ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। गर्म कपड़ों की दोहरी परत भी इन बर्फीली हवाओं को रोकने में नाकाम साबित हो रही है। ठंड का यह कहर न केवल आवाजाही पर भारी पड़ रहा है, बल्कि दैनिक मजदूरी और कृषि कार्यों से जुड़े लोगों की दिनचर्या को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। मौसम के इस बदलते मिजाज ने प्रशासन और आमजन दोनों को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है।

Pratahkal Bureau

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