खेरोदा। मेवाड़ अंचल में मौसम के बदले मिजाज और बर्फीली हवाओं के प्रहार ने आम जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। खेरोदा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से पारा गिरने और कड़ाके की ठंड के चलते हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। हाड़ कंपा देने वाली शीतलहर और घने कोहरे के कारण कस्बे सहित ग्रामीण इलाकों में सुबह और शाम के समय सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। सर्दी के तीखे तेवरों ने न केवल लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है, बल्कि व्यापारिक और कृषि गतिविधियों पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है।

ठंड का आलम यह है कि कस्बे के मुख्य केंद्र खेरोदा बस स्टैंड स्थित चौपाटी पर आज सुबह और देर शाम भारी ठिठुरन के बीच ग्रामीण एकजुट होकर पारंपरिक संसाधनों से राहत पाने की जद्दोजहद करते दिखे। बस स्टैंड पर स्थित चाय की थड़ियों और चौपाटी के विभिन्न कोनों पर लोग लकड़ियां जलाकर अलाव तापते हुए अपनी ऊर्जा संजोने का प्रयास कर रहे हैं। सर्दी की इस मार ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया है। शाम ढलते ही बाजार की रौनक फीकी पड़ जाती है और ग्राहकों की आवाजाही कम होने से स्थानीय व्यापारियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।

इस भीषण प्राकृतिक प्रकोप का सबसे अधिक प्रभाव पशुपालकों और राहगीरों पर पड़ा है। कोहरे की चादर और शीतलहर के कारण दृश्यता कम होने से सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं, वहीं खुले आसमान के नीचे रहने वाले मवेशियों को बचाना पशुपालकों के लिए कड़ी चुनौती बन गया है। खेरोदा के वरिष्ठ संवाद सहयोगी बुद्धि प्रकाश पाराशर द्वारा संकलित जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में ठंड का यह दौर वर्तमान में चरम पर है और लोग प्रशासन से भी इस दिशा में उचित प्रबंधों की उम्मीद लगाए बैठे हैं। फिलहाल, अलाव की तपिश ही इस कड़ाके की सर्दी में ग्रामीणों का एकमात्र सहारा बनी हुई है।

Pratahkal Bureau

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