राज्यसभा चुनाव: तेजस्वी की बैठक से AIMIM ने बनाई दूरी, अख्तरुल ईमान का बयान
बिहार राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी यादव के आवास पर हुई महागठबंधन की बैठक में एआईएमआईएम को निमंत्रण नहीं मिलने पर विधायक अख्तरुल ईमान ने तल्ख टिप्पणी की है।

पटना (एजेंसी)। बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच महागठबंधन की बैठक को लेकर एआईएमआईएम ने बड़ा बयान दिया है। एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि उन्हें महागठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए कोई निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने साफ कहा कि आरजेडी की ओर से उन्हें बैठक की कोई सूचना नहीं दी गई। दरअसल राज्यसभा चुनाव को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने सरकारी आवास पर महागठबंधन की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के नेता शामिल हुए। हालांकि इस बैठक में एआईएमआईएम के विधायक मौजूद नहीं थे। इसे लेकर जब मीडिया ने एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बैठक की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
हमें बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं: अख्तरुल
अख्तरुल ईमान ने कहा, "हमें बैठक के बारे में कोई खबर नहीं दी गई। आरजेडी की तरफ से हमें कोई निमंत्रण नहीं मिला। अब अगर यह उनकी बैठक है तो यह उनका मामला है।" उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी के घर में बैठक हो रही है तो उसमें क्या हो रहा है, यह पूछने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि "अगर यह पारिवारिक बैठक है तो उसमें क्या चल रहा है, इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है।"
'किसी के घर में हो रही बैठक पर क्या कहें'
एआईएमआईएम विधायक ने कहा कि आरजेडी अपने नेताओं और सहयोगियों के साथ बैठकर रणनीति बना रही है तो यह उनका आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा कि "हम किसी के घर में हो रही बैठक को लेकर क्या कह सकते हैं। अगर उन्हें बुलाया जाता तो वे जरूर इस पर विचार करते, लेकिन जब कोई सूचना ही नहीं दी गई तो इस पर प्रतिक्रिया देने का सवाल ही नहीं उठता।" मीडिया के एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि "आरजेडी को अगर किसी मुद्दे पर उनकी जरूरत होगी तो वह खुद उनसे संपर्क करेगी।" उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर जो भी राजनीतिक रणनीति बन रही है, उसके बारे में बेहतर होगा कि सवाल सीधे आरजेडी नेतृत्व से ही पूछा जाए।
एआईएमआईएम पर सबकी नजरें
गौरतलब है कि बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। महागठबंधन की बैठक को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि एआईएमआईएम को बैठक में आमंत्रित नहीं किए जाने के बाद सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान एआईएमआईएम किस तरह का रुख अपनाती है और क्या वह महागठबंधन के उम्मीदवार का समर्थन करती है या फिर अलग रणनीति के साथ आगे बढ़ती है।
आसमां से पाताल तक तबाही: अमेरिका ने ईरान पर गिराए 2000 पाउंड वजनी दर्जनों बंकर-भेदी बम
वॉशिंगटन (एजेंसी)। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले और तेज कर दिए हैं। अमेरिकी सेना अब विशेष रूप से उन ठिकानों को निशाना बना रही है जो जमीन के काफी नीचे बनाए गए हैं और जहां मिसाइल तथा अन्य हथियारों का भंडार रखा जाता है। यानी अमेरिका अब ईरान के आसामान से पाताल तक हमले कर रहा है। सीएनएन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने ईरान में 2000 पाउंड वजन वाले दर्जनों बंकर भेदी बम गिराए हैं। अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी जनरल डैन केन जो ने पेंटागन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हाल के दिनों में अमेरिकी बमवर्षक विमानों ने ईरान के कई भूमिगत मिसाइल लॉन्चर ठिकानों पर 2000 पाउंड वजन वाले दर्जनों जीपीएस-नियंत्रित बंकर-भेदी बम गिराए हैं।
ईरान की मिसाइल क्षमता को खत्म करना प्राथमिकता
इन हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जनरल केन ने कहा कि "ईरान की मिसाइल बनाने और दागने की क्षमता को खत्म करना फिलहाल अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य प्राथमिकता है।" जनरल केन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के कई ड्रोन निर्माण कारखानों को भी निशाना बनाया है ताकि उसकी स्वायत्त ड्रोन क्षमता को कमजोर किया जा सके। यानी अमेरिका अब केवल सतह पर मौजूद ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान के भूमिगत सैन्य औद्योगिक ढांचे पर भी लगातार हमले कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने वर्षों से अपने कई हथियार भंडार और मिसाइल लॉन्चर भूमिगत सुरंगों और बंकरों में सुरक्षित रखे हैं, जिससे उन्हें नष्ट करना काफी कठिन हो जाता है।
परमाणु ठिकानों पर अभी भी चुनौती और क्षेत्रीय तनाव
हालांकि अमेरिकी सेना का दावा है कि ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करने में प्रगति हो रही है, लेकिन एक बड़ी चुनौती अभी भी बाकी है, वह हैं ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकाने। रिपोर्टों के अनुसार इन ठिकानों में बड़े पैमाने पर समृद्ध यूरेनियम रखा हुआ है, जिसे केवल हवाई हमलों से पूरी तरह नष्ट करना संभव नहीं माना जा रहा। ऐसे में ईरान में अब जमीनी कार्रवाई की संभावना भी बढ़ने लगी है। सूत्रों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन इस बात पर भी विचार कर रहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो इन परमाणु भंडारों को कब्जे में लेने के लिए जमीनी सैन्य अभियान चलाया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा मिशन बहुत जोखिम भरा होगा और इसके लिए केवल विशेष बलों की छोटी टुकड़ी नहीं बल्कि बड़ी संख्या में सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है। मध्य-पूर्व में लगातार बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो यह केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

Pratahkal Bureau
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