भाणदा में जनसुनवाई का महाकुंभ: शिविर में उमड़े ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर हुआ निस्तारण
खेरवाड़ा की भाणदा पंचायत में आयोजित ग्रामीणों के लिए विशेष सेवा शिविर में प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर ही समस्याओं का समाधान कर नई उम्मीद जगाई। क्या सरकारी मशीनरी की यह तत्परता अब ग्रामीण विकास की तस्वीर बदल पाएगी? जानें पूरी खबर।

खेरवाड़ा के ग्राम पंचायत भाणदा स्थित राजीव गांधी सेवा केंद्र में आयोजित 'ग्रामीण सेवा शिविर' ने प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक नई इबारत लिखी है। उपखंड अधिकारी शिवन्या गुप्ता के निर्देशन और मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस शिविर ने सरकारी मशीनरी को सीधे आमजन के द्वार पर लाकर खड़ा कर दिया, जिससे लंबे समय से लंबित ग्रामीण समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो सका। ब्लॉक स्तर के 22 प्रमुख विभागों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक व्यापक स्वरूप प्रदान किया, जहाँ ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा और मांगों को अधिकारियों के समक्ष रखा। शिविर का वातावरण पूरी तरह से समाधान-केंद्रित रहा, जहाँ अधिकारियों ने न केवल शिकायतों को सुना, बल्कि मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर उनके निस्तारण की प्रक्रिया पूर्ण की।
शिविर की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासनिक और राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई हुई। इस दौरान 12 नामांतरण, 6 शुद्धिकरण, 2 सीमा ज्ञान और 1 बंटवारे के प्रकरणों को सुलझाया गया। इसके अतिरिक्त, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जॉब कार्ड, पट्टा वितरण और भवन निर्माण स्वीकृति जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को भी प्राथमिकता के साथ संपादित किया गया। राजस्व रिकॉर्ड के शुद्धिकरण और भूमि संबंधी मामलों में मिल रही तत्काल राहत ने ग्रामीणों के चेहरे पर स्पष्ट संतोष को जन्म दिया।
स्वास्थ्य और पशुपालन सेवाओं के एकीकरण ने शिविर को और अधिक प्रासंगिक बना दिया। चिकित्सा विभाग की ओर से बीपी, शुगर और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की जांच के साथ-साथ टीकाकरण की सुविधा प्रदान की गई, जिसका लाभ 153 लोगों ने उठाया, वहीं 72 लोगों ने आयुर्वेद परामर्श का लाभ लिया। इसी तरह, पशुपालन विभाग ने 131 पशुओं के उपचार के साथ ही मंगला पशु बीमा योजना के अंतर्गत 23 कार्यों को मूर्त रूप दिया। नोडल प्रभारी विकास अधिकारी मदन लाल लोहार, तहसीलदार रेवत राम और सरपंच भरत गरासिया समेत स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की।
प्रशासन की यह पहल महज एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रहकर आम जनता और शासन के बीच के फासले को पाटने वाला एक सशक्त माध्यम साबित हुई। जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच फंसे ग्रामीणों के लिए यह शिविर एक बड़ा संबल बनकर उभरा, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति और समन्वय हो, तो विकास और समाधान की गति को न केवल तेज किया जा सकता है, बल्कि उसे अंतिम छोर तक पहुंचाया भी जा सकता है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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