20 साल बाद भी अधूरा बावलवाड़ा पुलिस चौकी भवन, जर्जर कच्चे ढांचे और स्टाफ की कमी से बढ़ी चिंता
खेरवाड़ा तहसील के बावलवाड़ा कस्बे में वर्ष 2006 में स्वीकृत पुलिस चौकी भवन 20 साल बाद भी अधूरा है। चौकी जर्जर कच्चे भवन में भी संचालित नहीं हो पा रही और पुलिस स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से निर्माण पूरा कर चौकी पुनः शुरू करने की मांग उठाई है।

तस्वीर में खेरवाड़ा तहसील के बावलवाड़ा कस्बे में स्थित जर्जर और क्षतिग्रस्त पुलिस चौकी का भवन दिखाई दे रहा है।
खेरवाड़ा तहसील के बावलवाड़ा कस्बे की पुलिस चौकी का पक्का भवन निर्माण पिछले दो दशकों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2006 में चौकी भवन निर्माण के लिए करीब 6 लाख रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद आज तक भवन का निर्माण नहीं हो सका। वर्ष 2013 में बावलवाड़ा थाना बनने के बाद कस्बा पुलिस चौकी निष्क्रिय हो गई। भूमि विवाद समाप्त हुए भी करीब 15 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन न तो जर्जर भवन की जगह नया भवन बनाया गया और न ही चौकी पर पुलिस स्टाफ की नियुक्ति की गई।
वर्तमान में कस्बे की पुलिस चौकी कच्चे एवं जर्जर भवन में संचालित होने की स्थिति में भी नहीं है। चौकी लंबे समय से खाली पड़ी हुई है, जिससे कस्बे के नागरिकों को सुरक्षा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बावलवाड़ा कस्बे से थाना लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति, चोरी, दुर्घटना या अन्य वारदात के दौरान पुलिस को सूचना मिलने और मौके पर पहुंचने में अनावश्यक देरी होने की आशंका बनी रहती है। उनका कहना है कि यदि कस्बे में पुलिस चौकी सक्रिय हो और वहां पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए तो आमजन को त्वरित पुलिस सहायता मिल सकेगी तथा कानून-व्यवस्था भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।
बावलवाड़ा भाजपा मंडल महामंत्री भावेश उपाध्याय ने कहा कि कस्बे की बढ़ती आबादी और जनसुरक्षा की आवश्यकता को देखते हुए पुलिस चौकी भवन का शीघ्र निर्माण कराया जाना चाहिए तथा चौकी पर स्थायी रूप से पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्रवासियों को समय पर पुलिस सहायता उपलब्ध होगी और अपराधों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
क्षेत्र के नागरिकों ने राज्य सरकार एवं पुलिस प्रशासन से मांग की है कि वर्षों से लंबित पुलिस चौकी भवन निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर चौकी को पुनः संचालित किया जाए, ताकि कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके। दशकों पहले निर्मित पुलिस चौकी का भवन आज भी खंडहर जैसी स्थिति में खड़ा है, जो लंबे समय से अधूरे पड़े इस निर्माण कार्य और स्थानीय जनसुरक्षा से जुड़े सवालों को लगातार उजागर कर रहा है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)
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