बस्सी। वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए पिछले 24 घंटे कौतूहल और रोमांच की नई गाथा लिख गए। पूर्णिमा के विशेष अवसर पर बस्सी अभ्यारण्य क्षेत्र के 24 वॉटर हॉल्स पर आयोजित वार्षिक वन्यजीव गणना के दौरान जंगल की विविधता के अद्भुत दृश्य सामने आए। क्षेत्रीय वन अधिकारी नरेन्द्र सिंह विश्नोई के नेतृत्व में वनकर्मियों ने पूरी रात मचानों पर बैठकर वन्यजीवों की गतिविधियों को अत्यंत बारीकी से रिकॉर्ड किया। इस गणना में आधुनिक ट्रेप कैमरों का भी व्यापक सहयोग लिया गया, जिसमें पैंथर और पैंगोलिन जैसे जीवों की स्पष्ट मौजूदगी दर्ज हुई।

इस बार की गणना में सबसे अधिक चर्चा का विषय तीन ईगल (चील) का दिखाई देना रहा, जिसने विशेषज्ञों को गहन विश्लेषण के लिए प्रेरित किया है। गणना के दौरान न केवल पैंथर के स्पष्ट पग मार्क पाए गए, बल्कि उन्हें वॉटर हॉल्स के समीप विचरण करते हुए भी प्रत्यक्ष रूप से देखा गया। बस्सी सेंचुरी की इस समृद्ध जैव विविधता में पैंथर, दुर्लभ पैंगोलिन, चैसिंगा, उड़न गिलहरी और कबर बिज्जू जैसे जीवों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही सियार, जरख, छोटा बिज्जू, जंगली बिल्ली, नेवला, चिंकारा, चीतल, नीलगाय, लंगूर, खरगोश, काली पूंछ वाला नेवला, मगरमच्छ और अजगर भी नजर आए। पक्षियों की श्रेणी में पेंटेड स्टार्क, किंगफिशर और सारस की गणना भी प्रमुखता से की गई।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, गणना से प्राप्त ये ताजा और सटीक आंकड़े भविष्य की संरक्षण योजनाओं को प्रभावी बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे। इन आंकड़ों के आधार पर ही क्षेत्र में सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा तय की जाएगी। उल्लेखनीय है कि पिछली गणना के दौरान यहाँ स्टार कछुआ देखा गया था, जो इस अभ्यारण्य की पारिस्थितिकी महत्ता को दर्शाता है। यह सफल गणना बस्सी क्षेत्र में वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और उनके फलते-फूलते कुनबे की पुष्टि करती है।

Pratahkal HQ

Pratahkal HQ

Next Story