मृत्यु के बाद भगवान के दरबार में पुण्य कर्मों का ही महत्व: अनंतराम शास्त्री
बड़ी सादड़ी के नंगाखेड़ी में आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन संत अनंतराम शास्त्री ने श्रद्धालुओं को रामनाम संचय करने और सत्कर्मों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

बड़ी सादड़ी। उपखंड क्षेत्र के नंगाखेड़ी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को भक्ति और आध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रीरामद्वारा दिव्य आनंदधाम आश्रम के संत अनंतराम शास्त्री ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धर्म, भक्ति और सत्कर्मों की महत्ता पर प्रकाश डाला। शास्त्री महाराज ने गंभीर स्वर में लोक-परलोक के गूढ़ सत्य को साझा करते हुए कहा कि मृत्यु के पश्चात ईश्वर के दरबार में सांसारिक मुद्रा अर्थात कागज के नोटों की कोई कीमत नहीं होती, वहां केवल मनुष्य द्वारा अर्जित पुण्य कर्म ही स्वीकार्य होते हैं।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं को जीवन की सार्थकता का बोध कराते हुए संत ने कहा कि मानव जन्म केवल भौतिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि भलाई और धर्म के मार्ग पर चलने हेतु प्राप्त हुआ है, अतः इस बहुमूल्य अवसर को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने व्यक्ति को ऐसा जीवन जीने की प्रेरणा दी जिससे इहलोक के साथ-साथ परलोक भी सुधर सके। शास्त्री महाराज ने बल देकर कहा कि इस संसार रूपी सागर से पार उतरने के लिए मनुष्य को 'रामनाम' रूपी धन का संचय करना अनिवार्य है, क्योंकि अंत समय में केवल सत्कर्म और अटूट भक्ति ही आत्मा के सहगामी बनते हैं।
श्रीमद्भागवत कथा के इस प्रसंग के दौरान सैकड़ों भक्त भक्ति रस में पूरी तरह सराबोर नजर आए और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। शास्त्री महाराज ने सचेत करते हुए कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से प्रभु की शरण में जाता है, वही भवसागर से तर पाता है। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि मनुष्य अपने जीवन काल में श्रेष्ठ कर्म नहीं करता, तो उसे कर्मों के चक्र के कारण चौरासी लाख योनियों के कष्टकारी भ्रमण में भटकना पड़ता है। इस आयोजन ने संपूर्ण क्षेत्र के भक्तों को गहरे भक्ति भाव से जोड़ दिया है।

