खेरवाड़ा। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने आदिवासी समाज की संवैधानिक पहचान को लेकर एक बार फिर मुखर विरोध दर्ज कराया है। पार्टी के नेतृत्व में खेरवाड़ा उपखंड अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति एवं केंद्रीय गृह मंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रेषित किया गया। इस ज्ञापन के माध्यम से हाल ही में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के लिए 'वनवासी' शब्द के प्रयोग पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। पार्टी ने मांग की है कि भविष्य में सरकारी कार्यक्रमों, अभिलेखों एवं आधिकारिक दस्तावेजों में केवल संविधान सम्मत 'आदिवासी' अथवा 'अनुसूचित जनजाति' शब्द का ही प्रयोग सुनिश्चित किया जाए।

ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में स्पष्ट रूप से 'अनुसूचित जनजाति' शब्द का उल्लेख है। देश के विभिन्न जनजातीय समुदायों की सदियों पुरानी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान को 'वनवासी' शब्द संकुचित करता है, जबकि ये समुदाय स्वयं को 'आदिवासी' यानी मूल निवासी के रूप में पहचानते हैं। इस संबंध में सरकार से मांग की गई है कि 'वनवासी' शब्द के उपयोग को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि आदिवासी समुदाय की अस्मिता का संरक्षण हो सके।

यह ज्ञापन भारत आदिवासी पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष प्रमोद कुमार डामोर के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपा गया। इस अवसर पर डॉ. सुमन डामोर, भेरूलाल डामोर, नारायण डामोर, जयप्रकाश कटारा, मोहित डामोर, राहुल डामोर, चिराग डामोर, मन्नालाल, रणछोड़, राकेश डामोर, राजेश खोखरिया, जीतू कटारा और रमेश खोखरिया सहित अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ज्ञापन सौंपने के दौरान कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर दृढ़ दिखे और समाज की पहचान से जुड़े इस मुद्दे को उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने का संकल्प व्यक्त किया।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story