बांसवाड़ा में प्री-डीएलएड परीक्षा 2026 संपन्न, 80.08 फीसदी रही उपस्थिति
बांसवाड़ा जिले के 22 केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित प्री-डीएलएड परीक्षा में 13,241 अभ्यर्थी शामिल हुए, सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

बांसवाड़ा (प्रात:काल संवाददाता)। राज्य के सभी शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में संचालित दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (पूर्व में बीएसटीसी) में प्रवेश हेतु आयोजित प्री-डीएलएड परीक्षा 2026 बांसवाड़ा जिले के 22 परीक्षा केंद्रों पर पूर्णतः शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। परीक्षा में कुल 16,534 पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 13,241 अभ्यर्थी उपस्थित रहे, जिसका कुल उपस्थिति प्रतिशत 80.08 दर्ज किया गया।
परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की गई। प्रथम सत्र में 8,267 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 6,647 उपस्थित रहे, जबकि 1,620 अनुपस्थित पाए गए। द्वितीय सत्र (शाम की शिफ्ट) में 8,267 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 6,594 उपस्थित और 1,673 अनुपस्थित रहे। परीक्षा के जिला समन्वयक एवं गोविन्द गुरु कॉलेज के प्राचार्य प्रो. कल्याणमल सिंगाड़ा ने स्पष्ट किया कि किसी भी केंद्र से किसी प्रकार की अव्यवस्था की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है और परीक्षा पूरी तरह से सुचारू रही।
परीक्षा की गोपनीयता और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। प्रत्येक अभ्यर्थी की तीन स्तरीय जांच की गई। इस बार परीक्षा के दौरान नेटबंदी नहीं की गई, जो व्यवस्था की सुदृढ़ता का प्रमाण है। साथ ही, केन्द्राधीक्षक और केंद्र पर्यवेक्षक को छोड़कर किसी अन्य को भी मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। आयोजनकर्ता वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय ने सभी परीक्षार्थियों के लिए पर्सनलाइज्ड ओएमआर शीट तैयार की थी, जिस पर परीक्षार्थी का नाम, फोटो और रोल नंबर पहले से अंकित था। इस नवाचार से न केवल अभ्यर्थियों को आसानी हुई, बल्कि वीक्षकों को भी सुविधा मिली और रोल नंबर त्रुटि के कारण परिणाम में होने वाली संभावित गड़बड़ियों की आशंका समाप्त हो गई।
परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय ने उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाए। दोनों सत्रों में अभ्यर्थियों का प्रवेश निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया गया। केंद्रों पर भेजी गई गोपनीय प्रश्न पत्र पेटियों को खोलने के लिए डिजिटल पासवर्ड का उपयोग किया गया। परीक्षा की गोपनीयता के लिए ही विश्वविद्यालय ने कक्षानुसार विशिष्ट प्रश्न पत्र सेट निर्धारित किए थे। अभ्यर्थियों की उपस्थिति में ही प्रश्न पत्रों के पैकेट खोले गए और परीक्षा समाप्त होते ही ओएमआर शीट को उनकी मौजूदगी में सीलबंद किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई गई इस पारदर्शी प्रक्रिया की परीक्षार्थियों और परीक्षा कार्य में लगे कार्मिकों ने मुक्तकंठ से सराहना की है।

