चित्तौड़गढ़। चित्तौड़ प्रान्त के तत्वावधान में आयोजित बजरंग दल के सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का दूसरा दिन अनुशासित और ऊर्जावान वातावरण के साथ संपन्न हुआ। शिविर के द्वितीय दिवस की शुरुआत प्रातःकालीन स्मरण एवं आचार पद्धति के साथ हुई, जिसके बाद प्रशिक्षणार्थियों ने योग, व्यायाम एवं विभिन्न शारीरिक अभ्यासों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस क्रम में शिक्षार्थियों को समता, समूह आधारित गतिविधियों एवं संगठनात्मक कार्य पद्धति का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

शिविर के बौद्धिक सत्र में अखिल भारतीय समरसता प्रमुख एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता देवजी भाई ने सामाजिक समरसता एवं जीवन व्यवहार विषय पर युवाओं का मार्गदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने धर्मांतरण के गंभीर विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए इसके सामाजिक और सांस्कृतिक दुष्परिणामों को रेखांकित किया। देवजी भाई ने चेतावनी दी कि जनजातीय एवं गरीब क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रलोभन और आर्थिक सहायता के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराने के प्रयास समाज में विघटन और सांस्कृतिक असंतुलन पैदा कर रहे हैं। उन्होंने हिंदू समाज की घटती संख्या और वर्तमान चुनौतियों पर चिंतन करते हुए युवाओं को संगठित रहने का संकल्प दिलाया।

शिविर के अगले चरण में प्रान्त सह संयोजक एवं वर्ग प्रमुख करण सिंह ने बजरंग दल के ध्येय वाक्य 'सेवा, सुरक्षा और संस्कार' पर आधारित आपदा प्रबंधन सत्र का संचालन किया। उन्होंने स्वयंसेवकों को विभिन्न आपदाओं से निपटने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण सत्र में प्राथमिक उपचार, घायलों की सहायता, आपातकालीन संपर्क व्यवस्था, रक्तदान, राहत सामग्री वितरण एवं बचाव कार्यों में स्वयंसेवकों की निर्णायक भूमिका को स्पष्ट किया गया। करण सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आपदा के समय समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सेवा भाव के साथ पीड़ितों के कल्याण हेतु तत्पर रहना चाहिए। अनुशासन और समर्पण से ओत-प्रोत इस शिविर के आगामी दिनों में भी विविध विषयों पर मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जाएंगे।

Pratahkal HQ

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