बदराना स्थित स्थानीय राजकीय आयुर्वेद औषधालय (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) में बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य और सर्वांगीण मानसिक विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष स्वर्णप्राशन शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य शिविर के दौरान कुल 42 बच्चों को आयुर्वेदिक औषधि की निर्धारित खुराक पिलाई गई।

स्वर्णप्राशन के घटक और औषधीय महत्व

चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. शीला दरांगी ने इस अवसर पर औषधि की महत्ता स्पष्ट करते हुए बताया कि "स्वर्णप्राशन बच्चों के लिए एक प्राकृतिक 'इम्यूनिटी बूस्टर' है और यह स्वर्ण भस्म, शंखपुष्पी, ब्राह्मी, वचा, शुद्ध शहद और गाय के घी जैसी मेध्य एवं बलवर्धक औषधियों के मिश्रण से तैयार किया गया है।"

शारीरिक और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि

इस औषधि के नियमित सेवन से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता सुदृढ़ होती है जिससे उन्हें सर्दी, खांसी और बुखार जैसी मौसमी बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। इसके साथ ही यह बच्चों की स्मरण शक्ति, एकाग्रता और मेधा में वृद्धि कर उनके बौद्धिक विकास को गति प्रदान करता है। यह आयुर्वेदिक मिश्रण पाचन तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ भूख बढ़ाता है और बच्चों को आवश्यक शारीरिक बल प्रदान करने में सहायक सिद्ध होता है।

सफल प्रबंधन और सहयोगी टीम

इस विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम को सफल बनाने और औषधालय में सुचारू व्यवस्था बनाए रखने में योग प्रशिक्षक कुलदीप जोशी, आयुष मित्र विमला और परिचारक शांतिलाल की विशेष भूमिका रही। इनके सामूहिक प्रयासों से सभी 42 बच्चों को व्यवस्थित रूप से औषधि का लाभ प्राप्त हुआ।

Pratahkal Bureau

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