बडियार/बाड़मेर। ग्राम पंचायत बडियार के राजस्व ग्राम मरतडी में राजकीय प्रयोजनार्थ सुरक्षित भूमि को आबादी भूमि में परिवर्तित करने की योजना ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। शुक्रवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने लामबंद होकर इस निर्णय के विरोध में उपखंड अधिकारी को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा और प्रशासन से इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि खसरा नंबर 816/579 की जिस भूमि को आबादी विस्तार के लिए उपयोग में लाने की तैयारी की जा रही है, वह वास्तव में विद्यार्थियों के भविष्य और सार्वजनिक हितों के विरुद्ध है।

ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि विवादित खसरा नंबर 816/579 पर वर्तमान में कोई भी पक्का निर्माण मौजूद नहीं है। यह भूमि राजकीय विद्यालय के बिल्कुल समीप स्थित है, जहाँ सैकड़ों विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यदि इस भूमि का स्वरूप बदलकर यहाँ आबादी बसाई जाती है, तो स्कूल के शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और भविष्य में विद्यालय के विस्तार की संभावनाएं भी सदैव के लिए समाप्त हो जाएंगी। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की है कि इस निर्णय से न केवल शैक्षणिक गतिविधियों में व्यवधान उत्पन्न होगा, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण परिवेश को भी भारी क्षति पहुँचेगी।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब ग्रामीणों ने भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों की सक्रियता की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि कुछ असामाजिक तत्व और अतिक्रमणकारी इस बेशकीमती भूमि पर पक्का कब्जा करने की नियत से अवैध रूप से पत्थर डाल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की चुप्पी का लाभ उठाकर भू-माफिया इस जमीन को हथियाने का षड्यंत्र रच रहे हैं। इस दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि समय रहते अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई और भूमि को आबादी में परिवर्तित करने का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।

क्षेत्रीय जनहित को सर्वोपरि बताते हुए ग्रामीणों ने मांग की है कि खसरा नंबर 816/579 को यथावत राजकीय प्रयोजनार्थ ही सुरक्षित रखा जाए ताकि भविष्य में इसका उपयोग सार्वजनिक सेवाओं या विद्यालय विकास के लिए किया जा सके। ज्ञापन सौंपने के दौरान राजस्व ग्राम मरतडी के भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में सरकारी भूमि को बचाने का संकल्प दोहराया। अब देखना यह है कि प्रशासन ग्रामीणों की इस वाजिब मांग पर क्या रुख अपनाता है और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं।

Pratahkal Bureau

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