उदयपुर। प्रतापनगर थाना क्षेत्र में रविवार की रात एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव से जूझ रहे ऑटो चालक गेहरीलाल (35) ने अपने दो छोटे बच्चों को लावारिस छोड़ते हुए रसोईघर में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार की त्रासदी तब और गहरा गई, जब यह पता चला कि बच्चों की मां कोरोना महामारी के दौरान निधन हो चुकी थी।

पुलिस के अनुसार, गेहरीलाल पुत्र कचरूलाल दर्जी, निवासी धूलकोट चौराहा, बोहरा गणेशजी रोड, पिछले चार वर्षों से प्रकाश नागदा के मकान में किराए पर रह रहा था। वह 13 वर्षीय बेटी चंचल और 9 वर्षीय बेटे के साथ अपने छोटे से परिवार का पालन-पोषण करता था। कोरोना काल में पत्नी की मृत्यु के बाद उन्होंने ऑटो चलाकर परिवार का खर्चा चलाने की कोशिश की। लेकिन आर्थिक कठिनाइयों और मानसिक दबाव के बीच उनकी मोबाइल पर ऑनलाइन गेम की लत ने स्थिति और जटिल बना दी।

घटना के दिन रविवार रात गेहरीलाल ने परिवार के साथ खाना खाने के बाद अत्यधिक मानसिक तनाव में अपने कमरे में सोने का निर्णय लिया। उनकी 13 वर्षीय बेटी ने पिता से उनकी परेशानी साझा करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। रात के दौरान उन्होंने मोबाइल चार्ज पर लगाया और बच्चों के साथ सो गए।

सुबह जब बेटी उठी, तो पिता को अपने पास नहीं पाया। वह पूरे घर में तलाश करती रही और अंततः रसोईघर में पिता को पंखे के हुक से चुन्नी के सहारे फंदे पर लटकते हुए देखा। इसके बाद उसने शोर मचाया, जिससे मकान मालिक प्रकाशचंद्र और पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे। पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस टीम ने घटनास्थल पर पहुँचकर शव को फंदे से उतार कर एमबी चिकित्सालय ले जाया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया।

मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवा कर धूलको चौराहा टेम्पो मित्र मंडल को सौंपा गया। मित्र मंडल ने आपस में चंदा जुटाकर मकान मालिक के सहयोग से दोनों बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली और हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार उनके पिता का अंतिम संस्कार किया।

वर्तमान में बच्चों को यह भी जानकारी नहीं है कि उनके कोई रिश्तेदार हैं या नहीं। फिलहाल उनका पालन-पोषण और सुरक्षा समाजजनों की जिम्मेदारी बन गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आसपास के लोगों ने परिवार की देखभाल के लिए आगे आने का संकल्प लिया है।

यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि आर्थिक असुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी की वास्तविकता को उजागर करती है। समाज और परिवार के समर्थन की कमी में ऐसे दुखद हादसे आम हो सकते हैं, और यह हमें मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने और समय पर सहायता प्रदान करने की गंभीर आवश्यकता की याद दिलाता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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