नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर जमकर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी की सदन में उपस्थिति से लेकर महत्वपूर्ण विधेयकों पर होने वाली चर्चा में उनके हिस्सा नहीं लेने पर गंभीर टिप्पणियां कीं। गृह मंत्री ने सदन के पटल पर एक-एक कर उन 12 महत्वपूर्ण विधेयकों का जिक्र किया, जिन पर हुई चर्चा के दौरान राहुल गांधी सदन से नदारद रहे। अमित शाह की इन तीखी टिप्पणियों के बाद सदन में भारी हंगामा हुआ और विपक्ष के सांसदों ने जमकर नारेबाजी की।

राहुल गांधी की उपस्थिति और विधेयकों पर चर्चा से दूरी

अमित शाह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, "विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपने अधिकारों की बात करते हैं। वे तो आरोप भी लगाते हैं। जो स्वयं उनके हाथ में है, उसका मैं परफॉर्मेंस बताना चाहता हूं। 17वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 51 प्रतिशत रही। राष्ट्रीय औसत 67 प्रतिशत था। 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत और 15वीं लोकसभा में उपस्थिति 43 प्रतिशत रही। यह सब ऑन रिकॉर्ड है। वो कहते हैं कि हमें बोलने नहीं देते, लेकिन मेरा कहना है कि वो बोलना नहीं चाहते।"

गृह मंत्री ने उन 'युगांतकारी' विधेयकों की सूची गिनाई जिनमें राहुल गांधी ने हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण विधेयक, संविधान का 122वां संशोधन विधेयक, और आधार प्रणाली विधेयक जैसी महत्वपूर्ण चर्चाओं में राहुल गांधी शामिल नहीं हुए। अमित शाह ने आगे कहा कि मुस्लिम महिला तलाक विधेयक, जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, अनुच्छेद 370 रद्द करने से जुड़ा विधेयक, सीएए विधेयक, महामारी रोग संशोधन विधेयक, भारतीय न्याय संहिता से जुड़े विधेयक, आयकर सुधार विधेयक, वित्त विधेयक 2024 और वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा में भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया। इसी तरह वह पूरे शीतकालीन सत्र में उपस्थित नहीं रहे।

महत्वपूर्ण मौकों पर अनुपस्थिति को बताया 'रहस्यप्रद'

केंद्रीय गृह मंत्री ने राहुल गांधी की अनुपस्थिति को 'रहस्यप्रद' करार देते हुए कहा, "वंदे मातरम के 150 वर्ष पर चर्चा हो या और कैप्टन शुभ्रांशु शुक्ला का अभिनंदन प्रस्ताव हो, राहुल गांधी ने इनमें हिस्सा नहीं लिया। राहुल गांधी जी विपक्ष के माननीय नेता हैं। वे कांग्रेस के भी बड़े नेता हैं। हो सकता है कि अपनी पार्टी के प्रचार के लिए उन्हें देशभर में कहीं भी जाना पड़ता हो। कई बार सार्वजनिक जीवन में देखा जाता है कि लोकसभा के वक्त ही पार्टी के बड़े कार्यक्रम आ जाते हैं या चुनाव आ जाते हैं। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं को अपने पार्टी के विचार जनता को बताने और प्रचार करने के लिए जाना पड़ता है। यह स्वाभाविक है। सिर्फ राहुल जी के साथ ऐसा नहीं होता। अनेक नेताओं के साथ ऐसा होता है, लेकिन इसमें 'रहस्यप्रद' यह है कि जब राहुल गांधी यहां नहीं थे तो कहां थे?"

राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का सिलसिलेवार ब्यौरा

अमित शाह ने सदन में राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का डेटा रखते हुए बताया कि शीतकालीन सत्र 2025 में राहुल गांधी जर्मनी की यात्रा पर थे, बजट सत्र 2025 में वियतनाम की यात्रा पर थे, बजट सत्र 2023 में इंग्लैंड, बजट सत्र 2018 में सिंगापुर और मलेशिया की यात्रा पर थे। उन्होंने आगे याद दिलाया कि मानसून सत्र 2020 में भी वह विदेश यात्रा पर थे और बजट सत्र 2015 के दौरान पूरे 60 दिन वह विदेश यात्रा पर रहे। शाह ने सवाल किया, "क्या यह सब इत्तेफाक है कि जब-जब बजट सत्र या महत्वपूर्ण सत्र आता है तो इनकी विदेश यात्रा हो जाती है। फिर कहते हैं कि हमें बोलने नहीं देते।"

प्रेस कॉन्फ्रेंस और संसदीय मर्यादा पर टिप्पणी

गृह मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संसद में किसी की व्यक्तिगत प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, "ये लोग चाहते हैं कि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सदन में बहस हो, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि पहले भी इनके परिवार में बड़े-बड़े नेता हुए हैं, लेकिन किसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर संसद में बहस नहीं हो सकती।" अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के बड़े नेता हैं, लेकिन शीतकालीन सत्र के दौरान जब वह जर्मनी में थे, तो वहां से यहां कैसे बोल सकते थे। उन्होंने कटाक्ष किया, "जो व्यक्ति विदेश में है, यहां कैसे बोलेगा? यहां वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा नहीं है।"

Pratahkal Bureau

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